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रामलला चढ़ावा प्रकरण के बाद बड़े बदलाव की तैयारी, राम मंदिर ट्रस्ट में होगी CEO की नियुक्ति

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में जल्द ही मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का पद सृजित करने या किसी रिक्त स्थान के माध्यम से इस पद पर नियुक्ति करने पर विचार किया जा रहा है। संभावना है कि इस जिम्मेदारी के लिए किसी सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को चुना जा सकता है।

रामलला चढ़ावा प्रकरण के बाद बड़े बदलाव की तैयारी, राम मंदिर ट्रस्ट में होगी CEO की नियुक्ति
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अयोध्या: रामलला के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले के सामने आने के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सिर्फ तथ्यों की पड़ताल ही नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़े फैसले लेने की तैयारी में हैं।

ट्रस्ट में सीईओ नियुक्त करने पर विचार

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में जल्द ही मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का पद सृजित करने या किसी रिक्त स्थान के माध्यम से इस पद पर नियुक्ति करने पर विचार किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि इस जिम्मेदारी के लिए किसी सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को चुना जा सकता है। इसका उद्देश्य मंदिर में प्राप्त होने वाले दान, चढ़ावे और अन्य संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। सरकार देश के अन्य बड़े और प्रतिष्ठित मंदिरों की व्यवस्थाओं का भी अध्ययन कर रही है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में संचालन व्यवस्था पहले से लागू है। माना जा रहा है कि इसी मॉडल के आधार पर अयोध्या में भी प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया जा सकता है।

2020 में हुआ था ट्रस्ट का गठन

सर्वोच्च न्यायालय के 9 नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। इस ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों का प्रावधान किया गया था, जिनमें 12 मनोनीत सदस्य और तीन पदेन सदस्य शामिल हैं। पदेन सदस्यों में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अयोध्या के जिलाधिकारी के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था है। वर्तमान में ट्रस्ट में 14 सदस्य कार्यरत हैं और एक पद रिक्त है। पिछले वर्ष विश्व हिंदू परिषद के नेता कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्टी बनाया गया था। इसके बाद 24 अगस्त 2025 को अयोध्या राजपरिवार के प्रमुख और ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से एक स्थान खाली हुआ, जिस पर अब तक किसी नए सदस्य की नियुक्ति नहीं हुई है।

रिक्त पद के उपयोग या नए पद सृजन पर मंथन

सूत्रों का कहना है कि इसी खाली पद का उपयोग सीईओ नियुक्ति के लिए किया जा सकता है। दूसरा विकल्प यह है कि ट्रस्ट के भीतर एक नया प्रशासनिक पद सृजित किया जाए, जिससे कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाया जा सके। इस संबंध में कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

तीसरे दिन भी जारी रही एसआईटी की जांच

राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा प्रकरण की जांच में जुटी एसआईटी ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी मंदिर परिसर में डेरा डाले रखा। टीम ने कई वर्षों के वित्तीय अभिलेखों की जांच की और विभिन्न विभागों से जुड़े कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। बुधवार को विशेष रूप से उन कर्मचारियों से पूछताछ की गई, जिनकी जिम्मेदारी सीधे नकदी प्रबंधन से नहीं जुड़ी है, बल्कि वे सुरक्षा और मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं से संबंधित कार्यों में लगे हैं। जांच के दौरान यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा और बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई खामी तो नहीं रही।

अब तक 60 कर्मचारियों से पूछताछ

एसआईटी का अस्थायी कैंप कार्यालय मंदिर परिसर स्थित ग्रीन हाउस में बनाया गया है, जहां पूरे दिन पूछताछ और दस्तावेजों की जांच का काम चलता रहा। जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, ताकि सभी गतिविधियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। अब तक लगभग 60 कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है। शेष कर्मचारियों के बयान गुरुवार को दर्ज किए जाने की संभावना है। बुधवार रात करीब नौ बजे तक एसआईटी की टीम मंदिर परिसर में मौजूद रही और दस्तावेजों की पड़ताल करती रही।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम

चढ़ावा प्रकरण के बाद मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की कवायद तेज हो गई है। आने वाले दिनों में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और नई व्यवस्थाओं के लागू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे दान और संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक निगरानी और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके।


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