Top
Begin typing your search above and press return to search.

सपा नेता आजम खान को बड़ा झटका, जौहर ट्रस्ट को मिलने वाली आयकर छूट खत्म, चैरिटेबल दर्जा रद्द

जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 2021 में भाजपा नेता और वर्तमान विधायक आकाश सक्सेना ने ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और उसे प्राप्त चंदे को लेकर आयकर विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी।

सपा नेता आजम खान को बड़ा झटका, जौहर ट्रस्ट को मिलने वाली आयकर छूट खत्म, चैरिटेबल दर्जा रद्द
X

रामपुर : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को आयकर विभाग की ओर से बड़ा झटका लगा है। विभाग ने उनके मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का धारा 12AB के तहत प्राप्त चैरिटेबल पंजीकरण रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद ट्रस्ट को आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली कर छूट का लाभ नहीं मिल सकेगा। जौहर ट्रस्ट के माध्यम से ही रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन किया जाता है, इसलिए इस कार्रवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिकायत से शुरू हुई जांच

जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 2021 में भाजपा नेता और वर्तमान विधायक आकाश सक्सेना ने ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और उसे प्राप्त चंदे को लेकर आयकर विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में ट्रस्ट को मिले दान और उसके उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।

2023 में पड़ा था आयकर विभाग का छापा

जांच के क्रम में 13 सितंबर 2023 को आयकर विभाग ने आजम खान से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान रामपुर स्थित उनके आवास, जौहर विश्वविद्यालय और अन्य संबंधित स्थानों से दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड तथा कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए थे। विभाग ने जांच के दौरान प्राप्त सामग्री और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का विश्लेषण किया। आयकर विभाग का दावा है कि जांच में ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे यह संकेत मिला कि ट्रस्ट की गतिविधियां उसके घोषित सामाजिक और शैक्षणिक उद्देश्यों के अनुरूप नहीं थीं। विभाग का कहना है कि कर छूट प्राप्त करने के लिए जिन शर्तों का पालन आवश्यक होता है, उनका उल्लंघन किया गया है।

147 पेज के आदेश में गंभीर टिप्पणियां

प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (केंद्रीय), लखनऊ द्वारा जारी 147 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आदेश में ट्रस्ट को प्राप्त करोड़ों रुपये के चंदे की धनराशि को संदिग्ध बताते हुए उसके स्रोत और उपयोग पर शंकाएं व्यक्त की गई हैं। इसके अलावा वित्तीय लेन-देन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नियमों के अनुपालन को लेकर भी कई टिप्पणियां की गई हैं। आयकर विभाग ने ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ट्रस्ट की संरचना भी जांच के घेरे में

आदेश में ट्रस्ट की संरचना का भी उल्लेख किया गया है। जौहर ट्रस्ट के कुल नौ सदस्यों में से पांच सदस्य आजम खान के परिवार से जुड़े बताए गए हैं। विभाग ने अन्य चार गैर-पारिवारिक सदस्यों की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि ट्रस्ट के संचालन और निर्णय प्रक्रिया में परिवार का प्रभाव अधिक रहा है।

विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण पर सवाल

जांच के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में बने भवनों का भी मूल्यांकन कराया गया। जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार परिसर में कुल 59 भवन पाए गए, जिनका अनुमानित मूल्य लगभग 494.46 करोड़ रुपये आंका गया है। विभाग ने निर्माण लागत, वित्तीय स्रोतों और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच अंतर को भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। इसके अलावा ट्रस्ट द्वारा संचालित रामपुर पब्लिक स्कूल भी जांच के दायरे में रहा। हालांकि यह स्कूल अब बंद हो चुका है।

नोटिस के बाद नहीं मिला संतोषजनक जवाब

आयकर विभाग ने 19 जून को ट्रस्ट और आजम खान को नोटिस जारी कर विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। विभाग का कहना है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ, जिसके बाद पंजीकरण रद्द करने का निर्णय लिया गया।

ट्रस्ट ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, जौहर ट्रस्ट ने आयकर विभाग के आरोपों को खारिज किया है। ट्रस्ट का कहना है कि जारी किया गया नोटिस कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है और कई आरोप केवल बयानों तथा अनुमानों पर आधारित हैं। ट्रस्ट ने यह भी दावा किया कि उसके कई महत्वपूर्ण अभिलेख पूर्व में पुलिस कार्रवाई के दौरान जब्त कर लिए गए थे, जिसके कारण सभी दस्तावेज प्रस्तुत करना संभव नहीं था। ट्रस्ट के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर के कुछ भवन सरकारी एजेंसियों द्वारा सरकारी धन से निर्मित किए गए हैं। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि विभाग ने ट्रस्ट को पर्याप्त सुनवाई और जिरह का अवसर नहीं दिया। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it