माघ मेले विवाद: शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार पर कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान संगम घाट पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में कुमार विश्वास ने प्रतिक्रिया दी।

प्रशासन पर सवाल, शंकराचार्य से सम्मानजनक व्यवहार की अपील
- कुमार विश्वास बोले: शंकराचार्य शांति बनाए रखें, गुस्से को त्याग दें
- धर्म और संस्कृति की परंपरा पर विश्वास ने जताया सम्मान
- प्रयागराज संगम घाट विवाद पर कुमार विश्वास ने मांगी क्षमा, आशीर्वाद की अपील
मुरादाबाद। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान संगम घाट पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में कुमार विश्वास ने प्रतिक्रिया दी।
कुमार विश्वास ने इस मामले को दो पहलुओं से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे एक साधारण भक्त और धर्म का सम्मान करने वाले व्यक्ति हैं, इसलिए शंकराचार्य पर सीधी टिप्पणी करने का उन्हें अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा, "मैं एक साधारण भक्त और धर्म का सम्मान करने वाला व्यक्ति हूं, इसलिए शंकराचार्य पर सीधी टिप्पणी करने का मुझे अधिकार नहीं है, लेकिन फिर भी मैं दो बातें कहना चाहूंगा। पहली बात यह है कि प्रशासन को संवेदनशीलता से काम करना चाहिए था। भले ही कोई व्यक्ति संत प्रवृत्ति का हो, भगवा वस्त्र धारण किए हो और खुद को धर्म के लिए समर्पित कर चुका हो, उनसे बात करते समय सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।"
दूसरी बात में कुमार विश्वास ने कहा, "मैं पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना करता हूं कि अब वे इस मामले में शांति बनाए रखें, गुस्से को त्याग दें, और सभी पर कृपा बरसाएं।"
उन्होंने शंकराचार्य की परंपरा की सराहना की और कहा कि इसी परंपरा के कारण धर्म, दर्शन और संस्कृति का मान बढ़ा है।
आखिरी में उन्होंने सामान्य नागरिक के नाते कहा कि अगर कोई अपराध हुआ है तो वे पूज्य शंकराचार्य से क्षमा मांगते हैं। वे चाहते हैं कि शंकराचार्य सबके मंगल के लिए आशीर्वाद दें।
बता दें कि पिछले दिनों माघ मेले के दौरान रथ और पूरे लाव-लश्कर के साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पवित्र नदी में स्नान करने पहुंचे थे, जहां पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य और पुलिस प्रशासन के बीच झड़प हुई, जिसके बाद शंकराचार्य ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रशासन ने सब कुछ जानबूझकर किया।


