Top
Begin typing your search above and press return to search.

शिवा शर्मा हत्याकांड: पुलिस को चकमा देकर हाई कोर्ट पहुंची श्रद्धा दुबे, फरार आरोपितों पर इनाम 50 हजार रुपये

पुलिस की टीमें श्रद्धा की तलाश में रायबरेली से लखनऊ और गोरखपुर से नेपाल तक छानबीन कर रही थीं। इसी दौरान उसके लखनऊ पहुंचने और हाई कोर्ट परिसर में कुछ समय बिताने की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि वहां एक अधिवक्ता ने उससे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए।

शिवा शर्मा हत्याकांड: पुलिस को चकमा देकर हाई कोर्ट पहुंची श्रद्धा दुबे, फरार आरोपितों पर इनाम 50 हजार रुपये
X

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कैफे संचालक शिवा शर्मा की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। मामले में फरार चल रही श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और तनवीर उर्फ दानिश को पकड़ने में पुलिस अब तक सफल नहीं हुई है। इस बीच दावा किया जा रहा है कि श्रद्धा नेपाल के सोनौली बॉर्डर से भारत पहुंची और पुलिस को भनक लगे बिना लखनऊ हाई कोर्ट परिसर तक पहुंच गई। यहां कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद वह कथित तौर पर आगरा होते हुए सहारनपुर चली गई। इतना ही नहीं, उसने लखनऊ के एक मॉल के बेसमेंट में मीडिया से बातचीत कर खुद को निर्दोष बताया और पुलिस के पहुंचने से पहले वहां से निकल गई। आरोपितों की गिरफ्तारी में देरी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच विभागीय कार्रवाई भी की गई है।

पुलिस की तलाश के बीच लखनऊ पहुंचने का दावा

पुलिस की टीमें श्रद्धा की तलाश में रायबरेली से लखनऊ और गोरखपुर से नेपाल तक छानबीन कर रही थीं। इसी दौरान उसके लखनऊ पहुंचने और हाई कोर्ट परिसर में कुछ समय बिताने की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि वहां एक अधिवक्ता ने उससे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। इसके बाद वह एक्सप्रेसवे के रास्ते आगरा और फिर सहारनपुर पहुंच गई। दूसरी ओर, श्रद्धा के मॉल के बेसमेंट में मीडिया से बातचीत करने का वीडियो भी सामने आया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक वह वहां से जा चुकी थी। इस घटनाक्रम ने पुलिस की निगरानी और आरोपितों की तलाश के लिए बनाई गई रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, उसके पूरे यात्रा मार्ग और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सरेंडर को लेकर बातचीत पर क्यों बिगड़ी बात?

मामले से जुड़े पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि रविवार को श्रद्धा के आत्मसमर्पण को लेकर बातचीत चल रही थी। कथित योजना के तहत उसे मीडिया के सामने अपना पक्ष रखने के बाद थाने में सरेंडर करना था। यह भी दावा किया गया कि पुलिस मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार करती और बाद में मामले की जांच में उसकी भूमिका को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होती। हालांकि, सरेंडर की कथित योजना और उसके पीछे की शर्तों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा और उसके पक्ष के लोगों को प्रस्तावित शर्तें स्वीकार नहीं थीं। इसी वजह से वह निर्धारित समय से पहले मीडिया से बातचीत कर वहां से निकल गई।

हत्या या आत्महत्या, आरोपित पक्ष और जांच में विरोधाभास

इस मामले में एक अहम विवाद शिवा शर्मा की मौत की परिस्थितियों को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक, कथित बातचीत के दौरान मामले को गैर इरादतन हत्या के रूप में आगे बढ़ाने और श्रद्धा की भूमिका तय करने जैसे विकल्पों पर चर्चा होने की बात कही गई। वहीं, श्रद्धा कथित तौर पर घटना को आत्महत्या बताते हुए खुद को गवाह बनाए जाने और अपनी बहन रश्मि को मामले से बाहर रखने की मांग कर रही थी। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रविवार देर शाम एक समाचार एजेंसी के साथ श्रद्धा की बातचीत का वीडियो सामने आया, जिसमें उसने खुद को बेकसूर बताया। उसने घटना को आत्महत्या करार देते हुए पहले जारी किए गए वीडियो जैसी बातें दोहराईं। उसके बयान और पुलिस की जांच के बीच विरोधाभास बना हुआ है। मामले में मौत की वास्तविक परिस्थितियों का निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज

आरोपितों की गिरफ्तारी में देरी के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया गया है, जबकि हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है। उनकी जगह अर्पित विजयवर्गीय को डीसीपी सेंट्रल की जिम्मेदारी के साथ सुरक्षा और इंटेलिजेंस का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। रविवार को श्रद्धा, रश्मि और तनवीर उर्फ दानिश पर घोषित इनाम की राशि भी 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई। पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा के बुर्का पहनकर गोरखपुर पहुंचने की जानकारी भी मिली थी, लेकिन टीम के वहां पहुंचने तक वह हाथ नहीं लगी।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

हजरतगंज थाने और डीसीपी स्तर पर मामले की निगरानी के बावजूद आरोपितों का गिरफ्त से बाहर रहना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। खासकर मीडिया के सामने बयान देने के बाद श्रद्धा के फिर फरार होने के दावे ने विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब पुलिस के सामने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार करने के साथ-साथ शिवा शर्मा की मौत से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच करने की जिम्मेदारी है। श्रद्धा के दावों, कथित सरेंडर वार्ता और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े पहलुओं की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर होना जरूरी है। फिलहाल मामले में गिरफ्तारी और जांच के नतीजों का इंतजार है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it