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13 वर्षीय छात्र की फरियाद ने जीता अधिकारियों का दिल, डीएम से बोला—‘साहब, देखना नहीं... बस करवा दीजिए’

शहर के ईदगाह मोहल्ले का रहने वाला छात्र अमिताभ गुप्ता अपनी मां की ओर से शिकायत लेकर समाधान दिवस में पहुंचा था। उसने अधिकारियों को बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और घर का खर्च चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

13 वर्षीय छात्र की फरियाद ने जीता अधिकारियों का दिल, डीएम से बोला—‘साहब, देखना नहीं... बस करवा दीजिए’
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लखीमपुर खीरी: Lakhimpur News: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आयोजित तहसील समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने अधिकारियों के साथ-साथ वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। फरियादियों की भीड़ के बीच आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला 13 वर्षीय छात्र अपनी शिकायत लेकर सीधे जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह के सामने पहुंच गया। बच्चे ने अपनी पारिवारिक आर्थिक परेशानियों और भविष्य की चिंता को जिस आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ अधिकारियों के सामने रखा, उसने पूरे कार्यक्रम का माहौल बदल दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग छात्र की समझदारी, हिम्मत तथा बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं।

आर्थिक तंगी की कहानी खुद सुनाई

शहर के ईदगाह मोहल्ले का रहने वाला छात्र अमिताभ गुप्ता अपनी मां की ओर से शिकायत लेकर समाधान दिवस में पहुंचा था। उसने अधिकारियों को बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और घर का खर्च चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। बच्चे ने कहा कि उसकी मां की आय सीमित है और परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है। उसने अधिकारियों के सामने यह भी बताया कि सीमित संसाधनों के कारण घर का गुजारा मुश्किल से हो पा रहा है और महंगाई ने परेशानियां और बढ़ा दी हैं।

पैतृक मकान के विवाद का रखा मुद्दा

अमिताभ ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके पैतृक मकान के एक हिस्से पर ताला लगा होने के कारण परिवार उसका उपयोग नहीं कर पा रहा है। उसका कहना था कि यदि वह हिस्सा खाली हो जाए तो उसकी मां उसे किराए पर देकर परिवार की आमदनी बढ़ा सकती हैं। छात्र ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि इस विवाद का जल्द समाधान कराया जाए ताकि परिवार को आर्थिक राहत मिल सके और उनकी आजीविका बेहतर हो सके।

महंगाई और पढ़ाई पर भी जताई चिंता

सिर्फ पारिवारिक विवाद ही नहीं, छात्र ने शिक्षा और बढ़ती महंगाई का मुद्दा भी अधिकारियों के सामने रखा। उसने बताया कि उसकी बड़ी बहन की पढ़ाई आर्थिक कारणों से प्रभावित हो रही है और परिवार के लिए शिक्षा का खर्च उठाना आसान नहीं है। बच्चे ने कहा कि सीमित आय में घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना परिवार के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है। उसकी बातों में मासूमियत के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं की स्पष्ट समझ भी दिखाई दी।

एक जवाब ने पूरे हॉल में बिखेरी मुस्कान

छात्र की बातें सुनने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और पुलिस को जांच के निर्देश दिए। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने बच्चे को भरोसा दिलाया कि वे मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे। इस पर छात्र ने तुरंत मुस्कुराते हुए कहा, "साहब, देखना नहीं है... बस करवा दीजिए।" बच्चे की यह सहज और बेबाक प्रतिक्रिया सुनकर कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी मुस्कुरा उठे। यह पल पूरे समाधान दिवस का सबसे चर्चित क्षण बन गया।

डीएम ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

बच्चे की शिकायत और उसकी परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पुलिस टीम को परिवार के घर भेजने और मकान से जुड़े विवाद की जांच कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया। प्रशासन का उद्देश्य है कि यदि विवाद का समाधान संभव हो तो परिवार को राहत मिले और उनकी आय बढ़ाने का रास्ता खुल सके।

सोशल मीडिया पर हो रही सराहना

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग छात्र के साहस और समझदारी की प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि इतनी कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारी उठाने और प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का उसका तरीका प्रेरणादायक है। वहीं कुछ लोगों ने इसे इस बात का उदाहरण बताया कि बच्चों की आवाज भी गंभीरता से सुनी जानी चाहिए, क्योंकि कई बार वे बेहद सरल शब्दों में बड़ी सामाजिक समस्याओं को सामने रख देते हैं।

संवेदनशील प्रशासन और जागरूक नागरिक का उदाहरण

लखीमपुर खीरी की यह घटना केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि जब प्रशासन संवेदनशीलता से लोगों की बात सुनता है और नागरिक अपनी समस्या निडर होकर रखते हैं, तब समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल संभव होती है। 13 वर्षीय अमिताभ गुप्ता की हिम्मत, स्पष्ट सोच और हाजिरजवाबी ने न केवल अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा, बल्कि समाज को भी यह संदेश दिया कि समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठाना जरूरी है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर बनी हुई है।


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