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कानपुर में 35 साल पुरानी मुठभेड़ निकली फर्जी! 12 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा, जानें क्‍या था मामला

सीबीसीआइडी की जांच के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने कथित तौर पर निजी रंजिश के चलते राकेश पाठक को निशाना बनाया था। आरोप है कि मुफ्त में प्लॉट देने से इनकार करने के बाद पुलिस ने लूटपाट और मुठभेड़ की कहानी गढ़ी।

कानपुर में 35 साल पुरानी मुठभेड़ निकली फर्जी! 12 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा, जानें क्‍या था मामला
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कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में करीब 35 साल पहले हुई कथित पुलिस मुठभेड़ का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सीबीसीआइडी की जांच में पुलिस की उस कार्रवाई को फर्जी बताया गया है, जिसमें वर्ष 1991 में राकेश पाठक और उनके साथियों को लूटपाट, हत्या के प्रयास तथा अवैध हथियार रखने जैसे आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जांच के मुताबिक, मुफ्त में प्लॉट देने से इनकार करने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने कथित तौर पर राकेश पाठक को सबक सिखाने के लिए फर्जी लूट और मुठभेड़ की कहानी तैयार की थी। अब इस मामले में 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

प्लॉट देने से इनकार पर रची गई साजिश का आरोप

सीबीसीआइडी की जांच के अनुसार, तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने कथित तौर पर निजी रंजिश के चलते राकेश पाठक को निशाना बनाया था। आरोप है कि मुफ्त में प्लॉट देने से इनकार करने के बाद पुलिस ने लूटपाट और मुठभेड़ की कहानी गढ़ी। इस कार्रवाई में राकेश पाठक के मामा, तीन मजदूरों और अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया गया था, जबकि जांच में उनके कथित अपराध से जुड़े होने के पर्याप्त आधार नहीं मिले। सीबीसीआइडी ने वर्ष 1995 में जांच के दौरान 18 पुलिसकर्मियों को दोषी माना था। इनमें से छह की मृत्यु हो चुकी है। अब सीबीसीआइडी के एक इंस्पेक्टर की ओर से 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपों में वे धाराएं भी शामिल बताई गई हैं, जिनके तहत उस समय गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इनमें गंभीर अपराधों से संबंधित प्रावधान हैं, जिनमें दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

22 अगस्त 1991 की रात क्या हुआ था?

महाराजपुर थाने की पुलिस ने 22 अगस्त 1991 की रात जीटी रोड पर वाहनों से लूटपाट कर रहे बदमाशों के साथ मुठभेड़ होने का दावा किया था। यह मार्ग कानपुर-प्रयागराज हाईवे का हिस्सा है। पुलिस ने राकेश पाठक और उनके 11 साथियों की गिरफ्तारी दिखाते हुए उनके पास से अवैध हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद करने की बात कही थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी की तहरीर पर लूट, हत्या के प्रयास तथा शस्त्र और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसके बाद सभी आरोपितों को जेल भेज दिया गया। वे करीब 40 दिन तक जेल में रहे। राकेश पाठक के बड़े भाई देव प्रसाद पाठक ने शुरुआत से ही पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए। उन्होंने शासन से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उनका आरोप था कि पुलिस उनके घर से पिता के नाम पर दर्ज लाइसेंसी डबल बैरल बंदूक और राइफल जबरन ले गई थी और बाद में इन्हें कथित मुठभेड़ में बरामद हथियारों के रूप में दिखा दिया गया।

डीसीएम चालक और परिचालक के बयान से खुला मामला

सीबीसीआइडी की कानपुर इकाई के तत्कालीन इंस्पेक्टर आरपी सिंह ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान उस डीसीएम के चालक और परिचालक के बयान महत्वपूर्ण साबित हुए, जिसका उल्लेख पुलिस ने कथित लूट और मारपीट की घटना में किया था। दोनों ने पुलिस की कहानी को गलत बताते हुए कहा था कि घटना वाली शाम वे साबुन लादकर कानपुर से वाराणसी जा रहे थे। उनके अनुसार, रामादेवी चौराहे पर एक सिपाही ने वाहन रुकवाकर उसमें जगह ली। इसके बाद छह अन्य लोग भी वाहन में बैठ गए। चालक और परिचालक के मुताबिक, कुछ लोग नशे में थे और आपत्ति जताने के बावजूद उन्हें बैठाने के लिए दबाव बनाया गया। बाद में महाराजपुर थाने के कुछ अन्य पुलिसकर्मी भी उनके साथ हो गए। जांच में इन बयानों के आधार पर पुलिस की कथित मुठभेड़ की कहानी पर गंभीर सवाल उठे। सीबीसीआइडी ने इसी मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई।

न्याय की लड़ाई लड़ने वाले परिवार ने जताई खुशी

राकेश पाठक की बाद में एक हादसे में मृत्यु हो गई थी, लेकिन उनके बड़े भाई देव प्रसाद पाठक लगातार इस मामले को उठाते रहे। अब 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर उन्होंने संतोष जताया है। उनके लिए यह कार्रवाई वर्षों से उठाए जा रहे सवालों और न्याय की मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महाराजपुर थाना प्रभारी जनार्दन सिंह ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच सीबीसीआइडी ही करेगी। अब जांच में सामने आए तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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