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जौहर यूनिवर्सिटी पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना, तजीन फातिमा ने ध्वस्तीकरण आदेश को दी चुनौती

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा, जबकि पूर्व सांसद तजीन फातिमा ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बताया है।

जौहर यूनिवर्सिटी पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना, तजीन फातिमा ने ध्वस्तीकरण आदेश को दी चुनौती
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लखनऊ/रामपुर: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा विश्वविद्यालय की कई इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश के बाद कानूनी और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा, जबकि पूर्व सांसद तजीन फातिमा ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बताया है।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले से जुड़ी एक खबर साझा करते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि भाजपा को शिक्षा के क्षेत्र में भी सांप्रदायिकता दिखाई देती है। उनके अनुसार, शिक्षा, शिक्षक, विद्यार्थी और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो अन्य मामलों में भी समान मानदंड अपनाने चाहिए।

किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद के साथ-साथ अखिलेश यादव ने किसानों के मुद्दे पर भी केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ और खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। साथ ही आगरा के फतेहाबाद में कथित रूप से कर्ज से परेशान एक किसान की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए सरकार से किसानों के हित में प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

तजीन फातिमा ने बताया राजनीतिक कार्रवाई

समाजवादी पार्टी नेता और पूर्व सांसद तजीन फातिमा ने गुरुवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन और पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ कानूनी रणनीति पर चर्चा की। तजीन फातिमा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक और बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि मामले में न्यायालय द्वारा विश्वविद्यालय को निर्धारित समय दिया गया है और प्रशासन को उस समय-सीमा का सम्मान करना चाहिए।

ध्वस्तीकरण आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी

तजीन फातिमा ने संकेत दिए कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ध्वस्तीकरण आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगा। उनका कहना है कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले सभी संवैधानिक अधिकारों का सम्मान होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

आरडीए का दावा और विश्वविद्यालय का पक्ष

रामपुर विकास प्राधिकरण ने हाल ही में दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना किया गया है। इसी आधार पर प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि जिन इमारतों का निर्माण हुआ था, उस समय संबंधित क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। हालांकि, प्राधिकरण ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया है और अपने आदेश को उचित बताया है।

यूनिवर्सिटी की सड़क बनी सार्वजनिक मार्ग

इसी बीच प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर से होकर गुजरने वाली लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों ने सड़क के प्रवेश द्वार पर 'आम रास्ता' का बोर्ड भी लगा दिया है। बताया गया कि इस सड़क के निर्माण पर लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत आई थी। वर्ष 2019 में इसे आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन अब प्रशासन ने इसे फिर से सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने का निर्णय लिया है।

कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बढ़ा विवाद

जौहर यूनिवर्सिटी का मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बन गया है। एक ओर प्रशासन निर्माण नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कार्रवाई कर रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। अब इस पूरे मामले में आगे की दिशा काफी हद तक न्यायालय में होने वाली सुनवाई और प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगी। फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।


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