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इस्कॉन मंदिर : नोएडा अथॉरिटी ने जारी किया ध्वस्तीकरण नोटिस, मंदिर प्रबंधन ने लगाए गंभीर आरोप

नोएडा के सेक्टर-151 स्थित कामबख्शपुर गांव में निर्माणाधीन इस्कॉन मंदिर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा मंदिर निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस जारी किए जाने के बाद मंदिर प्रबंधन ने नाराजगी जाहिर करते हुए प्राधिकरण पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, नोएडा अथॉरिटी का कहना है कि मंदिर परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे और आवश्यक अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा है।

इस्कॉन मंदिर : नोएडा अथॉरिटी ने जारी किया ध्वस्तीकरण नोटिस, मंदिर प्रबंधन ने लगाए गंभीर आरोप
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नोएडा। नोएडा के सेक्टर-151 स्थित कामबख्शपुर गांव में निर्माणाधीन इस्कॉन मंदिर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा मंदिर निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस जारी किए जाने के बाद मंदिर प्रबंधन ने नाराजगी जाहिर करते हुए प्राधिकरण पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, नोएडा अथॉरिटी का कहना है कि मंदिर परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे और आवश्यक अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा है।

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार मंदिर परिसर में डबल बेसमेंट का निर्माण किया जा रहा है, जबकि इसके लिए न तो भवन मानचित्र (मैप) स्वीकृत कराया गया और न ही निर्माण कार्य की अनुमति ली गई। अथॉरिटी का यह भी कहना है कि धार्मिक स्थलों के निर्माण या विस्तार के लिए जिला प्रशासन और जिलाधिकारी कीअनुमति आवश्यक होती है। दूसरी ओर, इस्कॉन मंदिर प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि मंदिर से संबंधित नक्शा, ड्राइंग और रजिस्ट्री समेत सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही नोएडा अथॉरिटी को सौंपे जा चुके हैं।

मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह कोई नया धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि करीब 25 वर्षों से मौजूद पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण और विस्तार किया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार कामबख्शपुर गांव स्थित पुराना इस्कॉन मंदिर जर्जर अवस्था में पहुंच चुका था, जिसके चलते उसे तोड़कर आधुनिक स्वरूप में नए मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। प्रबंधन का यह भी दावा है कि मंदिर का डिज़ाइन उसी आर्किटेक्ट द्वारा तैयार किया गया है, जिन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर की वास्तुकला से जुड़े कार्यों में योगदान दिया है।

विवाद को और हवा तब मिली जब मंदिर प्रबंधन ने आरोप लगाया कि जिस भूमि पर मंदिर स्थित है वह नोएडा प्राधिकरण की नोटिफाइड जमीन नहीं है और अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर है। इसके समर्थन में मंदिर प्रबंधन ने एक पत्र भी सार्वजनिक किया है, जिसमें भूमि को धार्मिक उपयोग के लिए पहले से प्रयुक्त बताया गया है।

साथ ही, प्रबंधन का कहना है कि भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज कन्वर्जन) का मामला पहले ही प्राधिकरण के समक्ष रखा जा चुका है। मंदिर प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि आसपास कई अवैध निर्माण मौजूद हैं, लेकिन कार्रवाई केवल मंदिर निर्माण को लेकर की जा रही है। प्राधिकरण को अन्य अवैध निर्माण दिखाई नहीं देते जबकि मंदिर निर्माण पर विशेष आपत्ति जताई जा रही है। फिलहाल इस मामले में नोएडा प्राधिकरण और मंदिर प्रबंधन आमने-सामने हैं।



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