अवैध सेंट्रल मार्किट प्रकरण : पूरे शहर पर समान कार्रवाई का आदेश आया तो जागे जनप्रतिनिधि
बुधवार को सर्किट हाउस में भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई

- ज़िया चैधरी
- अवैध निर्माणों पर आदेश के बाद बीजेपी की पत्रकार वार्ता, सरकार का पक्ष रखा
- पुनर्वास नीति से राहत का वादा, 16 हजार निर्माणों का दोबारा होगा सर्वे
मेरठ। बुधवार को सर्किट हाउस में भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें सांसद अरुण गोविल, राज्य मंत्री सोमेंदर तोमर, विधायक अमित अग्रवाल, मेयर हरिकांत अहलूवालिया और महानगर अध्यक्ष विवैक रस्तोगी मौजूद रहे। प्रेस वार्ता का मुख्य विषय था सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला, जिसने सेंट्रल मार्केट से लेकर पूरे जनपद में फैले अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है।
बीजेपी के जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि शीर्ष अदालत का आदेश सर्वोपरि है और उसका पालन किया जाएगा। आदेश के मद्देनजर आवास विकास की सभी योजनाओं में पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित लोगों को राहत देने की योजना बनाई जा रही है।
साथ ही, मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) द्वारा जोन-ए में किए गए सर्वे में लगभग 16 हजार से अधिक अवैध निर्माणों का सर्वे दोबारा कराया जाएगा ताकि सही तस्वीर सामने आ सके।
बता दें कि विगत 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई थी। आवास विकास के 44 आवासीय भूखंडों पर शत-प्रतिशत कमर्शियल निर्माण को लेकर अदालत ने साफ कहा कि शेष 20 को भी ध्वस्त करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माण चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, अधिकारियों की लापरवाही या उम्र के आधार पर उसे वैध नहीं ठहराया जा सकता।
इसलिए सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस आदेश के बाद से मेरठ में अलग ही माहौल देखा जा रहा था। इस माहौल को भांपते हुए बीजेपी की ओर नेताओं ने सफाई पेश कर कहा कि सेंट्रल मार्केट को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है, लेकिन सरकार पुनर्विकास नीति के जरिए प्रभावित लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।
एमडीए से दोबारा सर्वे कराने की मांग भी रखी गई। इस तरह बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए जनहित और पुनर्वास दोनों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। बता दें कि पहले भी मेरठ को अनिश्चितकालीन बंद को खुलवाने के लिए भाजपाईयों ने तत्कालीन कमिश्नर से 661/6 के अलावा अन्य कोई दुकान नहीं तोड़ने का आदेश जारी कराया था।
जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी और कमिश्नर को अदालत से माफी मांगनी पड़ी। अब देखना ये होगा कि नई नीति को जनता के बीच कैसे पहुंचाया जाएगा और एमडीए द्वारा किए गए सर्वे को दोबारा कराकर शीर्ष अदालत में कैसे पेश करेंगे।


