अवैध सेंट्रल मार्किट प्रकरण : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उल्देपुर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू
सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद उल्देपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के विरोध में शुक्रवार को अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया

मेरठ बचाओ संघर्ष समिति ने दिया समर्थन
- संबंधित विभागों पर प्रभावी कार्रवाई न करने का आरोप
मेरठ। सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद उल्देपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण के विरोध में शुक्रवार को अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया। संयुक्त मेरठ बचाओ आंदोलन समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के नेतृत्व में उल्देपुर चैराहे के पास टेंट लगाकर धरना दिया गया। इसमें कॉलोनी मालिक, भूखंड और मकान खरीदार, किसान, व्यापारी, अस्पताल संचालक तथा स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए। लोगों ने नारे लगाए और साफ कहा कि वे अपने घरों पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) को उल्देपुर में मौजूद प्रत्येक अवैध ढांचे को जल्द से जल्द ध्वस्त करने का आदेश दिया था। साथ ही शहर के जोन-ए में चिह्नित करीब 16,726 अवैध भवनों को सील करने के निर्देश भी दिए गए।
कोर्ट ने अवैध कॉलोनियों की गहन जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी गठित किया है। आयोग जमीन की प्रकृति, नक्शे और अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगा। इन आदेशों के बाद उल्देपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों में गहरी चिंता और आक्रोश फैल गया है।
धरने में शामिल लोगों का कहना है कि वर्षों से इन कॉलोनियों में मकान और प्लॉट की खरीद-फरोख्त होती रही। कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां घर बनाए या भूखंड खरीदे। उस समय संबंधित विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। अब अचानक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनके आशियाने पर खतरा मंडरा रहा है।
रविंद्र गुर्जर ने कहा कि यह कार्रवाई एकतरफा है। जिन भवनों को अवैध बताया जा रहा है, उनके मालिकों को न तो नोटिस दिए गए और न ही उनका पक्ष सुना गया। सीधे सूची कोर्ट के सामने पेश कर दी गई। किसान नेता विजय राघव ने आरोप लगाया कि बड़े कॉरपोरेट घरानों के हजारों अवैध निर्माणों को छोड़कर गरीबों के घरों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि एक सप्ताह के अंदर बड़ी कंपनियों के अवैध निर्माणों की सूची भी कोर्ट में पेश करें। धरना स्थल पर हुई पंचायत में प्रदीप कुमार, ओमप्रकाश पाल, जॉन धनकड़, गौरव सिंह, प्रवीण चैहान और उल्देपुर के पूर्व प्रधान शीतल चैहान समेत कई वक्ताओं ने अपनी बात रखी। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बचाने के लिए कोई कानून बनाया जाए या कोर्ट से स्टे ऑर्डर लाया जाए।
लोगों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं टाली जाएगी, तब तक धरना और आंदोलन जारी रहेगा। मेरठ बचाओ संघर्ष समिति का समर्थन पाकर यह आंदोलन और मजबूत हो गया है। उल्देपुर के निवासी अब अपने घरों की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े हैं।


