IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा क्यों चर्चा में? बेबाक अफसर की अलग पहचान, अखिलेश बोले- ईमानदार अधिकारियों पर दबाव
दिव्या मित्तल ने कहा कि वह काफी समय से इस्तीफा देने के बारे में विचार कर रही थीं और अपने फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी आगे की कुछ योजना है, जिसके बारे में वह उचित समय पर जानकारी देंगी।

लखनऊ: Divya Mittal Resignation: उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का इस्तीफा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक सेवा के दौरान अपनी बेबाक कार्यशैली और फील्ड में सीधे जनता के बीच पहुंचने के लिए पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल ने सरकारी सेवा से अलग होने का फैसला किया है। उनके इस्तीफे के बाद उनके अगले कदम को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। दिव्या मित्तल की पहचान ऐसे अधिकारी के तौर पर बनी, जिन्होंने फील्ड पोस्टिंग के दौरान सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को सिर्फ कार्यालय तक सीमित रखने के बजाय सीधे गांवों तक पहुंचाने पर जोर दिया। दूसरी ओर, जनप्रतिनिधियों के दबाव के बीच भी अपने फैसलों पर कायम रहने के कारण उनका कार्यकाल कई बार सुर्खियों में रहा।
मीरजापुर में ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ से बनी अलग पहचान
सितंबर 2022 में दिव्या मित्तल ने मीरजापुर के जिलाधिकारी का पद संभाला था। इस दौरान उन्होंने जिले के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में प्रशासन की पहुंच बढ़ाने पर खास जोर दिया। ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ और ग्राम चौपाल जैसे अभियानों के जरिए वह ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचीं और लोगों से सीधे उनकी समस्याएं सुनीं। इन कार्यक्रमों में वह अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर समस्याओं की जानकारी लेती थीं और संबंधित विभागों को समाधान के निर्देश देती थीं। इससे ग्रामीणों के बीच उनकी प्रशासनिक छवि मजबूत हुई। उनके कार्यकाल में हलिया क्षेत्र के लहुरियादह गांव तक पाइपलाइन के जरिये पेयजल पहुंचाने की पहल को खास तौर पर याद किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, दशकों से पेयजल संकट झेल रहे इस दुर्गम क्षेत्र में पानी पहुंचने से बड़ी राहत मिली।
पेयजल परियोजना को लेकर जनप्रतिनिधियों से खिंचीं दूरियां
लहुरियादह पेयजल परियोजना के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर भी विवाद की खबरें सामने आई थीं। इस मामले में मीरजापुर की तत्कालीन सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के खेमे की नाराजगी की चर्चा हुई थी। हालांकि, दिव्या मित्तल के तबादले की खबर आने के बाद मीरजापुर में उनके प्रति लोगों का समर्थन भी देखने को मिला। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने उन्हें फूलों की वर्षा के साथ विदाई दी। यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। मीरजापुर से तबादले के बाद करीब चार महीने तक वह प्रतीक्षारत रहीं।
देवरिया में भी जनप्रतिनिधियों से टकराव
जुलाई 2024 में दिव्या मित्तल को देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया। यहां भी उनकी कार्यशैली को लेकर चर्चा जारी रही। जुलाई 2025 में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक के दौरान अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े सवाल उठे। इस दौरान दिव्या मित्तल ने जनप्रतिनिधियों से प्रशासनिक कामकाज पर अनुचित दबाव नहीं बनाने की बात कही थी। इसके बाद उनका देवरिया से तबादला कर दिया गया। मई 2026 में उन्हें राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। अब उन्होंने सरकारी सेवा से इस्तीफा देने का फैसला किया है।
‘काफी समय से इस्तीफे के बारे में सोच रही थी’
दिव्या मित्तल ने कहा कि वह काफी समय से इस्तीफा देने के बारे में विचार कर रही थीं और अपने फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी आगे की कुछ योजना है, जिसके बारे में वह उचित समय पर जानकारी देंगी। उनके अगले कदम को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, जनता से उनके सीधे जुड़ाव और सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता को देखते हुए समाज सेवा के क्षेत्र में उतरने से लेकर राजनीतिक पारी शुरू करने तक की अटकलें लगाई जा रही हैं। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि वह अपने पति गगनदीप सिंह के व्यवसाय में सहयोग कर सकती हैं। हालांकि, इनमें से किसी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
12 आइएएस अफसरों ने छोड़ी है समय से पहले नौकरी
बीते कुछ वर्षों में यूपी काडर के करीब एक दर्जन आइएएस अधिकारी वीआरएस लेकर सेवा से बाहर हो चुके हैं। इससे पहले राजीव अग्रवाल (1993 बैच), मोहम्मद मुस्तफा (1995 बैच), रेणुका कुमार (1987 बैच), जूथिका पाटणकर (1988 बैच), रिग्जियान सैम्फिल (2003 बैच), विकास गोठलवाल (2003 बैच), विद्या भूषण (2008 बैच), राकेश वर्मा, आरपी सिंह और अभिषेक सिंह (2011 बैच) ने समय से पहले नौकरी छोड़ी है। अनामिका सिंह (2004 बैच) ने दिसंबर 2025 में वीआरएस मांगा था और केंद्र से मंजूरी के बाद उनका वीआरएस 30 जनवरी 2026 से प्रभावी हुआ। इन अधिकारियों में कुछ ने व्यक्तिगत कारणों को सेवा छोड़ने की वजह बताया था।
अखिलेश यादव बोले- ईमानदार अधिकारियों पर बनाया जा रहा दबाव
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की नौकरशाही को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों पर अनैतिक और गैरकानूनी काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। अखिलेश ने दावा किया कि अधिकारियों पर कमीशन के जरिए भ्रष्टाचार करने, भाजपा कार्यकर्ताओं के पक्ष में टेंडर प्रभावित करने और ट्रांसफर-पोस्टिंग को कथित तौर पर कारोबार में बदलने का दबाव है। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों के बिना शासन और प्रशासन प्रभावी तरीके से नहीं चल सकता। हालांकि, अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। ऐसे में उनके बयान को दिव्या मित्तल के इस्तीफे से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन दोनों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने की पुष्टि नहीं हुई है।
अब नजर दिव्या मित्तल की अगली पारी पर
दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सफर बताता है कि उन्होंने फील्ड में जनता से सीधे संवाद को अपनी कार्यशैली का अहम हिस्सा बनाया। मीरजापुर और देवरिया में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों और जनप्रतिनिधियों के साथ मतभेदों ने उन्हें चर्चा में रखा। अब सरकारी सेवा से बाहर आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिव्या मित्तल अपनी अगली पारी किस क्षेत्र में शुरू करती हैं। उन्होंने फिलहाल अपनी योजना को लेकर कोई विस्तृत घोषणा नहीं की है, इसलिए राजनीतिक या सामाजिक क्षेत्र में उनकी संभावित भूमिका को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर तस्वीर साफ होने का इंतजार है।


