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आई लव मोहम्मद हमारा अधिकार, राजनीति न हो : मौलाना कल्बे जवाद

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में मौलाना कल्बे जवाद ने ‘आई लव मोहम्मद’ कहने को अपना हक बताया

आई लव मोहम्मद हमारा अधिकार, राजनीति न हो : मौलाना कल्बे जवाद
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आई लव मोहम्मद कहना हमारा अधिकार : मौलाना कल्बे जवाद

  • कल्बे जवाद बोले-आस्था के नारों में राजनीति बर्दाश्त नहीं
  • मौलाना ने ‘आई लव मोहम्मद’ अभियान को बताया धार्मिक, राजनीतिक हस्तक्षेप की निंदा
  • हुसैनाबाद ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप, आजम खान पर भी उठाए सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में मौलाना कल्बे जवाद ने शुक्रवार को ‘आई लव मोहम्मद’ कहने को अपना हक बताया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ‘आई लव मोहम्मद’ एक धार्मिक अभियान था, जिसे धार्मिक लोगों ने शुरू किया था, लेकिन यह दुख की बात है कि अब इसमें कुछ राजनीतिक प्रवृत्ति के लोग संलिप्त हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय के लोग ‘आई लव मोहम्मद’ कह रहे हैं, तो निश्चित तौर पर हिंदू समुदाय के लोग ‘आई लव राम’ कह सकते हैं। कोई ‘आई लव कृष्ण’ कह सकता है, तो कोई ‘आई लव शैतान’ भी कह सकता है। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। लोग अपनी आस्था के हिसाब जो मन चाहे, उसका नारा लगा सकते हैं। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन, अब जिस तरह से ‘आई लव मोहम्मद’ अभियान में राजनीतिक प्रवृत्ति के लोग शामिल हो चुके हैं, उसकी हम खुले शब्दों में निंदा करते हैं। इस तरह की स्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश रहेगी कि जिस तरह से आई लव मोहम्मद अभियान में राजनीतिक लोग शामिल होकर इसका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, अब हम वैसा नहीं होने देंगे।

वहीं, आजम खान के प्रकरण पर मौलाना ने कहा कि अगर सही मायने में सरकार ने उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए होते, तो वो कभी सलाखों से बाहर आ ही नहीं पाता। वो तो उसके छोटे मोटे मुकदमे दर्ज किए गए। इस वजह से वो बाहर आ पाया।

साथ ही, हुसैनाबाद ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हुसैनाबाद ट्रस्ट के आय के उचित स्रोत की जानकारी जिलाधिकारी नहीं देते हैं। यह सभी लोग पैसे खा जाते हैं। ये लोग अब करोड़ों रुपये खा चुके हैं। इस ट्रस्ट की आमदनी कहां जा रही है, इसके बारे में पता होता हैं। इसमें कई अधिकारी शामिल होते हैं। अधिकारी यहां पर अपनी नियुक्ति के लिए लालायित रहते हैं। यह सभी अधिकारी सारा पैसा खा जाते हैं।


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