UP News: चिता पर लेटकर खिंचवाई तस्वीर, बकरे का दाह संस्कार कर खुद को बताया मृत
पुलिस की जानकारी के अनुसार, राजकुमार ने 30 मई 2025 को गाजीपुर के रजागंज श्मशान घाट पर अपनी मौत का नाटक किया। उसने चिता पर लेटकर तस्वीर खिंचवाई, ताकि लोगों को विश्वास हो सके कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद कथित तौर पर एक मृत बकरे का दाह संस्कार कराया गया।

गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक शख्स ने हत्या के मुकदमे और करीब 60 लाख रुपये के कर्ज से बचने के लिए अपनी मौत का ऐसा नाटक रचा कि पुलिस भी हैरान रह गई। आरोपी राजकुमार राजभर उर्फ राजू ने खुद को मृत साबित करने के लिए चिता पर लेटकर तस्वीर खिंचवाई, जबकि अंतिम संस्कार एक मृत बकरे का कराया गया। इतना ही नहीं, उसने अपने पांच वर्षीय बेटे के नाम से शोक संदेश छपवाया और तेरहवीं के नाम पर भोज भी आयोजित किया। करीब 18 महीने तक पहचान छिपाकर रहने के बाद वह 25 अक्टूबर को अपने परिवार से मिलने पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
हत्या के मुकदमे में चल रही थी सुनवाई
पुलिस के मुताबिक, 38 वर्षीय राजकुमार राजभर पर ईंट-भट्ठा संचालक योगेश सिंह की हत्या का मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि 19 दिसंबर 2016 को 40 हजार रुपये की देनदारी को लेकर हुए विवाद में राजकुमार ने अपने साथी सुदर्शन राजभर के साथ मिलकर योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में अदालत में सुनवाई जारी थी। इसी दौरान शेयर ट्रेडिंग में हुए नुकसान और करीब 60 लाख रुपये के कर्ज ने राजकुमार की मुश्किलें बढ़ा दीं। पुलिस के अनुसार, हत्या के मुकदमे में कानूनी कार्रवाई और भारी कर्ज से बचने के लिए उसने अपनी पहचान मिटाने तथा मृत घोषित होने की योजना बनाई।
श्मशान घाट पर रची खुद की मौत की कहानी
पुलिस की जानकारी के अनुसार, राजकुमार ने 30 मई 2025 को गाजीपुर के रजागंज श्मशान घाट पर अपनी मौत का नाटक किया। उसने चिता पर लेटकर तस्वीर खिंचवाई, ताकि लोगों को विश्वास हो सके कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद कथित तौर पर एक मृत बकरे का दाह संस्कार कराया गया। इस पूरी योजना का मकसद लोगों और संबंधित अधिकारियों को यह विश्वास दिलाना था कि राजकुमार अब जीवित नहीं है। पुलिस के मुताबिक, उसने इस कहानी को वास्तविक दिखाने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए।
फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और शोक संदेश का सहारा
खुद को मृत साबित करने की साजिश को मजबूत करने के लिए राजकुमार ने कथित तौर पर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया। इसके बाद अपने पांच वर्षीय बेटे के नाम से शोक संदेश भी छपवाया, ताकि आसपास के लोगों और परिचितों को उसकी मौत की जानकारी दी जा सके। पुलिस के अनुसार, 11 जून को उसने ब्रह्मभोज का आयोजन भी किया। इस तरह उसने सामाजिक रीति-रिवाजों का सहारा लेकर अपनी मौत की कहानी को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की। हालांकि, यह पूरी योजना लंबे समय तक पुलिस की नजर से बचने के बावजूद आखिरकार सामने आ गई।
आजमगढ़ और गाजीपुर में बदलता रहा ठिकाने
खुद को मृत घोषित कराने के बाद राजकुमार कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाकर रहने लगा। पुलिस के अनुसार, उसने आजमगढ़ के रानी की सराय और गाजीपुर में अलग-अलग ठिकानों पर समय बिताया। इस दौरान वह करीब 18 महीने तक परिवार और परिचितों से दूरी बनाकर रहा, ताकि किसी को उसकी वास्तविक स्थिति का पता न चल सके। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस दौरान उसे किन लोगों ने मदद पहुंचाई और फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराने में किसकी भूमिका रही।
चिकित्सक की शिकायत से खुला मामला
इस पूरे मामले का खुलासा एक चिकित्सक की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत के आधार पर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े मामले की जांच शुरू हुई और पुलिस को राजकुमार की कथित साजिश के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, 25 अक्टूबर को राजकुमार पत्नी और बेटे से मिलने पहुंचा। इसी दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस हत्या के मुकदमे, कथित फर्जी दस्तावेजों और अपनी मौत का झूठा रिकॉर्ड तैयार कराने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस जांच में सामने आएंगे साजिश के बाकी पहलू
राजकुमार की गिरफ्तारी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराने की प्रक्रिया और इसमें शामिल अन्य लोगों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। हत्या के मामले में उसकी कानूनी स्थिति का निर्धारण अदालत में सुनवाई के दौरान होगा। वहीं, कथित तौर पर अपनी मौत का झूठा नाटक रचने और दस्तावेजों में हेरफेर करने के आरोपों पर भी कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा सकती है।


