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नोएडा हिंसा के बाद CM योगी ने श्रमिक सुरक्षा पर दिया जोर, अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश

नोएडा में हुए हालिया उपद्रव का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हिंसा और अराजकता फैलाने वाले तत्वों की पहचान कर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाएं, ताकि आम जनता को भी इनके बारे में जानकारी हो सके।

नोएडा हिंसा के बाद CM योगी ने श्रमिक सुरक्षा पर दिया जोर, अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में हालिया अशांति के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बुधवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश की औद्योगिक स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रमिकों के हितों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों को सम्मानजनक कार्य वातावरण, समय पर पूरा वेतन और सभी वैधानिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि बढ़े हुए वेतन का लाभ श्रमिकों को 1 अप्रैल से हर हाल में दिया जाए।

असामाजिक तत्वों की पहचान के निर्देश

नोएडा में हुए हालिया उपद्रव का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हिंसा और अराजकता फैलाने वाले तत्वों की पहचान कर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाएं, ताकि आम जनता को भी इनके बारे में जानकारी हो सके। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने और श्रमिकों को भड़काने वाले संगठनों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई करने को कहा।

मैनपावर एजेंसियों की होगी गहन जांच

मुख्यमंत्री योगी ने मैनपावर सप्लाई एजेंसियों में संभावित अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि वास्तविक श्रमिकों की संख्या क्या है, औद्योगिक इकाइयों से कितना भुगतान लिया जा रहा है, श्रमिकों को वास्तविक रूप से कितना वेतन दिया जा रहा है, ईएसआई, बीमा और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों के साथ समन्वय कर श्रमिकों के लिए दुर्घटना और असामयिक मृत्यु की स्थिति में सुरक्षा बीमा सुनिश्चित किया जाए।

श्रमिकों के लिए आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर

मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि श्रमिकों के लिए डॉर्मेट्री (सामूहिक आवास) और सस्ती आवासीय योजनाएं तैयार की जाएं। श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। चिकित्सा बीमा की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इसके अलावा, सभी औद्योगिक इकाइयों सरकारी और निजी में शिकायत निवारण सेल स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि श्रमिक अपनी समस्याएं आसानी से दर्ज करा सकें।

कार्यस्थलों पर मेस सुविधा का भी निर्देश

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक इकाइयों से यह भी अपेक्षा जताई कि वे अपने कार्यस्थलों पर श्रमिकों के लिए भोजन (मेस) की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इससे श्रमिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और कार्यस्थल का वातावरण भी सुधरेगा।

सीधे खाते में वेतन

ग्रेटर नोएडा कलेक्ट्रेट में आयोजित एक बैठक में उच्चस्तरीय समिति ने अहम निर्णय लेते हुए कहा कि अब सभी आउटसोर्सिंग और संविदा एजेंसियों को श्रमिकों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा करना होगा। इसके साथ ही एजेंसियों को श्रमिकों को वेतन पर्ची (सैलरी स्लिप) देना भी अनिवार्य होगा। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अपंजीकृत एजेंसियों पर कड़ी नजर

श्रम विभाग के अनुसार, नोएडा में करीब 1500 मैनपावर एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन इनमें से केवल 600 ही पंजीकृत हैं। ऐसे में अपंजीकृत एजेंसियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। समिति ने कुछ संदिग्ध एजेंसियों को नोटिस भी जारी किए हैं और उनके कामकाज की जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस सत्यापन और सामाजिक सुरक्षा अनिवार्य

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी श्रमिकों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें भविष्य निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योजनाओं में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। श्रमिकों की मदद के लिए एक हेल्पलाइन नंबर (9411900251) भी जारी किया गया है, जहां वे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

उपद्रव पर एजेंसियों को चेतावनी

जिला प्रशासन ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों को सख्त चेतावनी दी है। डीएम मेधा रूपम ने देर रात हुई बैठक में कहा कि यदि किसी एजेंसी के जरिए नियुक्त श्रमिक उपद्रव, हिंसा या अनुशासनहीनता में शामिल पाए जाते हैं, तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

कानून-व्यवस्था और श्रमिक हित पर फोकस

सरकार के इन कदमों से साफ है कि एक ओर जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के अधिकारों और सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे न केवल औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिरता आएगी, बल्कि श्रमिकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

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