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योगी की शाह-नवीन से मुलाकात के बाद होगा विभागों का बंटवारा! यूपी में बड़ा फेरबदल

10 मई को हुए योगी मंत्रिमंडल विस्तार में सभी 60 मंत्री पद भर दिए गए थे, लेकिन नए मंत्रियों को अब तक विभाग नहीं सौंपे गए हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इसी बात की है कि किस मंत्री को कौन सा विभाग मिलेगा।

योगी की शाह-नवीन से मुलाकात के बाद होगा विभागों का बंटवारा! यूपी में बड़ा फेरबदल
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों के बाद प्रदेश मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे और संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी ने अमित शाह के आवास पर करीब एक घंटे तक बैठक की। इस दौरान हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के आवंटन, सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा तस्वीरों में योगी आदित्यनाथ अमित शाह को पुष्पगुच्छ भेंट करते नजर आए।

विभागों के बंटवारे पर सबकी नजर

10 मई को हुए योगी मंत्रिमंडल विस्तार में सभी 60 मंत्री पद भर दिए गए थे, लेकिन नए मंत्रियों को अब तक विभाग नहीं सौंपे गए हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इसी बात की है कि किस मंत्री को कौन सा विभाग मिलेगा। खासतौर पर लोक निर्माण विभाग (PWD) को लेकर सबसे ज्यादा अटकलें लगाई जा रही हैं। यह विभाग प्रदेश सरकार का सबसे प्रभावशाली और संवेदनशील विभाग माना जाता है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विभागों का बंटवारा केवल प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि इसमें सामाजिक, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी अहमियत दी जाएगी। भाजपा मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए संतुलित राजनीतिक संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।

नितिन नवीन से भी हुई अहम चर्चा

अमित शाह से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया और ‘एक्स’ पर तस्वीर साझा करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस दौरान प्रदेश संगठन में संभावित बदलावों और नई टीम को लेकर भी चर्चा हुई। भाजपा सरकार और संगठन को नए स्वरूप में ढालकर आगामी चुनावों की तैयारी मजबूत करना चाहती है। बताया जा रहा है कि प्रदेश भाजपा संगठन में नई जिम्मेदारियों को लेकर भी मंथन चल रहा है।

नए मंत्रियों को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

योगी सरकार के हालिया विस्तार में छह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जबकि दो राज्य मंत्रियों को पदोन्नति दी गई। भाजपा ने इस विस्तार में दलित और ओबीसी वर्ग को विशेष प्राथमिकता दी है। नए मंत्रियों में तीन ओबीसी और दो दलित नेताओं को शामिल किया गया है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि उन्हें केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित न रखकर महत्वपूर्ण विभाग भी दिए जा सकते हैं। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इससे सामाजिक संतुलन मजबूत होगा और पार्टी का राजनीतिक संदेश भी व्यापक रूप से जाएगा।

पुराने मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल संभव

हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार में किसी पुराने मंत्री को हटाया नहीं गया, लेकिन कई मंत्रियों के विभाग बदले जाने की संभावना जताई जा रही है। पिछले कुछ समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई विभागों की समीक्षा की थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागों के कामकाज को लेकर सरकार पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी। ऐसे में प्रदर्शन के आधार पर विभागों में फेरबदल किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन बेहतर रहा है, उन्हें अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।

पीडब्ल्यूडी विभाग को लेकर बढ़ी चर्चा

लोक निर्माण विभाग को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल दिखाई दे रही है। वर्ष 2022 में सरकार बनने के बाद यह विभाग जितिन प्रसाद को सौंपा गया था, लेकिन उनके केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद से यह विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है। अब चर्चा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं कुछ राजनीतिक हलकों में केशव प्रसाद मौर्य के नाम की भी चर्चा हो रही है। लोक निर्माण विभाग की अहमियत को देखते हुए इसे लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक स्तर पर सक्रिय लॉबिंग जारी है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के करीब आए मनोज पांडेय को भी कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के बाद राजनीतिक समीकरणों को नए नजरिए से देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि योगी सरकार विभागों के बंटवारे के जरिए कौन सा राजनीतिक संदेश देती है।


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