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ए.आई. के दुरुपयोग और डीपफेक पर सख्त कानून की मांग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि ए.आई. के बढ़ते दुरुपयोग, विशेषकर डीपफेक तकनीक के माध्यम से वास्तविक व्यक्तियों की फोटो और वीडियो से छेड़छाड़ के मामलों को गंभीर बताते हुए एडवोकेट ज़ीशान सिद्दीकी, पूर्व विशेष आमंत्रित सदस्य, जिला बार एसोसिएशन मेरठ ने भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर इस पर सख्त प्रतिबंध और कड़े नियंत्रण लगाने की मांग की है

एडवोकेट ज़ीशान सिद्दीकी ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

मेरठ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि ए.आई. के बढ़ते दुरुपयोग, विशेषकर डीपफेक तकनीक के माध्यम से वास्तविक व्यक्तियों की फोटो और वीडियो से छेड़छाड़ के मामलों को गंभीर बताते हुए एडवोकेट ज़ीशान सिद्दीकी, पूर्व विशेष आमंत्रित सदस्य, जिला बार एसोसिएशन मेरठ ने भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर इस पर सख्त प्रतिबंध और कड़े नियंत्रण लगाने की मांग की है।

एडवोकेट ज़ीशान सिद्दीकी ने अपने पत्र में कहा है कि जहाँ एक ओर एआई तकनीक विकास और सुविधा का माध्यम बन रही है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से समाज में गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।

विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों की गरिमा, निजता और सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” (पूर्व में ट्विटर) के एआई बॉट “ग्रोक” के माध्यम से वास्तविक व्यक्तियों की तस्वीरों को आपत्तिजनक रूप में बदलकर डीपफेक बनाए जाने के मामले सामने आए, जिस पर अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देशों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

वहीं मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने इस टूल पर पूर्ण प्रतिबंध भी लगाया। एडवोकेट सिद्दीकी ने कहा कि यदि विकसित देशों को भी एआई के दुरुपयोग पर सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं, तो भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में इसके खतरे कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं।

वर्तमान में देश में साइबर अपराध, ब्लैकमेलिंग, मानहानि तथा फर्जी डिजिटल सामग्री के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो भविष्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

अपने पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि भारत में वास्तविक व्यक्तियों की फोटो और वीडियो पर आधारित एआई एडिटिंग व डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग पर तत्काल प्रतिबंध या कड़ा नियमन लागू किया जाए। साथ ही एआई के माध्यम से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, गरिमा और निजता को नुकसान पहुँचाने को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध घोषित किया जाए। उन्होंने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी एआई टूल्स पर विशेष निगरानी तंत्र विकसित करने और एआई के सुरक्षित एवं नैतिक उपयोग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट कानून और दिशा-निर्देश बनाने की भी मांग की।


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