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साइबर सेल ने हरियाणा से 85 लाख की ठगी गिरोह के आरोपी को किया गिरफ्तार

गौतमबुद्धनगर पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 85 लाख रुपए की ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े एक अहम आरोपी को गिरफ्तार किया है

साइबर सेल ने हरियाणा से 85 लाख की ठगी गिरोह के आरोपी को किया गिरफ्तार
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नोएडा। गौतमबुद्धनगर पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 85 लाख रुपए की ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े एक अहम आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की गिरफ्तारी हरियाणा के गुरुग्राम से की गई है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी मोबाइल कंपनी का पीओएस एजेंट था और उसने भारतीय सिम को ई-सिम के रूप में एक्टिवेट कर उसे कंबोडिया में संचालित साइबर अपराधियों तक पहुंचाया था। वहीं से इस सिम का इस्तेमाल कर लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का शिकार बनाया जा रहा था।

पुलिस के मुताबिक, थाना साइबर क्राइम नोएडा में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान पता चला कि पीड़ित को खुद को पुलिस, सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराया गया और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर उससे 85 लाख रुपए की ठगी कर ली गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मैनुअल इंटेलिजेंस के जरिए जांच शुरू की। जांच में खुलासा हुआ कि जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट की ठगी में किया गया था, वह एक भारतीय सिम थी, जिसे ई-सिम के रूप में एक्टिवेट किया गया था। यह काम एक पीओएस एजेंट द्वारा किया गया था।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और 18 मई को गुरुग्राम से उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सूरज पुत्र फूल सिंह निवासी पानीपत, हरियाणा के रूप में हुई है। आरोपी की उम्र 26 वर्ष बताई गई है और वह 10वीं पास है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने लालच में आकर भारतीय सिम को विदेश में उपयोग के लिए सक्रिय किया, जिसका इस्तेमाल कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर साइबर अपराध को अंजाम देने में किया। इस मामले में थाना साइबर क्राइम गौतमबुद्धनगर में आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताकर पैसे मांगने वालों पर विश्वास न करें। किसी भी अज्ञात लिंक, स्क्रीन शेयरिंग ऐप या मोबाइल एक्सेस रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। साथ ही ओटीपी, बैंक डिटेल्स, यूपीआई पिन और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।


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