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उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस ने बदला प्रभारी, राजेंद्र पाल गौतम को मिली जिम्मेदारी

कांग्रेस पार्टी ने अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले शुक्रवार को राज्य के लिए राजेंद्र पाल गौतम को नया कांग्रेस प्रभारी नियुक्त किया

उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस ने बदला प्रभारी, राजेंद्र पाल गौतम को मिली जिम्मेदारी
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नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले शुक्रवार को राज्य के लिए राजेंद्र पाल गौतम को नया कांग्रेस प्रभारी नियुक्त किया। इस संबंध में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव केसी. वेणुगोपाल ने एक बयान जारी किया है।

गौतम ने इस अहम जिम्मेदारी के लिए अजय कुमार लल्लू की जगह ली है। भाजपा शासित राज्य में मतदाता अप्रैल 2027 के आसपास विधानसभा के 403 नए सदस्यों को चुनेंगे। 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने केवल दो सीटें जीती थीं।

कांग्रेस ने ओडिशा और हरियाणा के लिए भी नए एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किए।

वेणुगोपाल के हस्ताक्षर वाले नोट में कहा गया है, "कांग्रेस अध्यक्ष ने तत्काल प्रभाव से संजय दत्त (हरियाणा); लालजी देसाई (ओडिशा) और राजेंद्र पाल गौतम (उत्तर प्रदेश) को इन राज्यों का एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया है।"

वेणुगोपाल ने कहा, "पार्टी निवर्तमान महासचिवों/प्रभारियों अविनाश पांडे, बीके हरिप्रसाद और अजय कुमार लल्लू के योगदान की सराहना करती है।"

उत्तर प्रदेश में नए एआईसीसी प्रभारी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब पार्टी ने अयोध्या राम मंदिर दान में 'गड़बड़ी' और श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय और यूपी कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की नेता आराधना मिश्रा ने नई दिल्ली में एआईसीसी मुख्यालय में हाल ही में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि भक्तों द्वारा दान किए गए फंड और राम मंदिर परियोजना से जुड़ी संपत्तियों का गलत प्रबंधन किया गया है और उन्होंने ट्रस्ट के कामकाज की गहन जांच (ऑडिट) की मांग की।

अजय राय ने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अपर्याप्त थी और उसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं थी। साथ ही उन्होंने जांच टीम में विवादित अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने मांग की कि जांच 7 से 10 दिनों के भीतर पूरी की जाए और इसकी निगरानी हाई कोर्ट के मौजूदा जज करें। उन्होंने आरोप लगाया कि चंदा इकट्ठा करने, जमीन के लेन-देन और भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे के प्रबंधन समेत कई स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं। उन्होंने दावा किया कि यह मामला संसाधनों के 'सिस्टमैटिक' और 'ऑर्गनाइज़्ड' दुरुपयोग से जुड़ा है।


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