बचपन का सपना हुआ साकार, इंजीनियर आर्यन मलिक बने लेफ्टिनेंट
भारतीय सेना में अधिकारी बनकर आर्यन ने बढ़ाया परिवार, गांव और क्षेत्र का गौरव; बधाई देने के लिए घर पहुंच रहे ग्रामीण

बागपत। जनपद बागपत की तहसील बड़ौत क्षेत्र के कासिमपुर खेड़ी गांव निवासी स्वर्गीय श्री हरनारायण मलिक (लाखिया) के पौत्र एवं श्री गजेंद्र मलिक और श्रीमती रश्मि मलिक के पुत्र आर्यन मलिक ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। आर्यन की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है। उनकी सफलता की खबर मिलते ही ग्रामीणों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का उन्हें तथा उनके परिवार को बधाई देने के लिए घर पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है।
आर्यन मलिक ने महाराजा सूरजमल इंजीनियरिंग कॉलेज, दिल्ली से बीटेक की शिक्षा प्राप्त की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्होंने अपने बचपन के उस सपने को नहीं छोड़ा, जिसमें वे भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करना चाहते थे। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने निरंतर मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ तैयारी की तथा अंततः अपने सपने को साकार कर दिखाया।
5 सितंबर 2026 को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के दौरान आर्यन मलिक ने सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करते हुए भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उनके परिवार की वर्षों की मेहनत, उम्मीद और सपनों को गौरवपूर्ण मुकाम मिला।
आर्यन के पिता श्री गजेंद्र मलिक दिल्ली सरकार से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता श्रीमती रश्मि मलिक दिल्ली सरकार के आईटीआई में शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे रही हैं। माता-पिता के संस्कार, अनुशासन, शिक्षा और निरंतर प्रोत्साहन ने आर्यन को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी। परिवार के लिए यह उपलब्धि विशेष गर्व का विषय है कि उनके बेटे ने इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद देश की सेवा के लिए भारतीय सेना को अपना करियर चुना।
पासिंग आउट परेड का अवसर मलिक परिवार के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण रहा। आर्यन के माता-पिता ने उनकी वर्दी पर लेफ्टिनेंट के सितारे लगाकर उन्हें देशसेवा के नए दायित्व के लिए आशीर्वाद दिया। यह पल परिवार के लिए जीवनभर याद रहने वाला गौरवपूर्ण क्षण बन गया।
आर्यन की उपलब्धि की खबर गांव पहुंचते ही कासिमपुर खेड़ी में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोग बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचकर परिवार वालो को बधाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बेटे का भारतीय सेना में अधिकारी बनना पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी आर्यन की सफलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।
आर्यन की कहानी उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है, जो अपनी शिक्षा और प्रतिभा के माध्यम से देश की सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल करने के साथ-साथ राष्ट्रसेवा को भी जीवन का उद्देश्य बनाया जा सकता है। इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद भारतीय सेना में अधिकारी बनना उनके बहुआयामी व्यक्तित्व, मेहनत और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आर्यन मलिक का मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और मन में दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं है। भारतीय सेना की वर्दी पहनना उनके बचपन का सपना था और आज लेफ्टिनेंट के रूप में देशसेवा का अवसर मिलना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।
आर्यन मलिक की इस उपलब्धि पर परिवारजनों, ग्रामीणों, रिश्तेदारों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें हार्दिक बधाई दी है। सभी ने विश्वास जताया कि आर्यन अपनी साहस, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम से भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे तथा अपने परिवार, गांव और क्षेत्र का नाम निरंतर रोशन करेंगे।
आर्यन मलिक की सफलता केवल एक युवा के सपने की जीत नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण है—जिस सपने को उन्होंने बचपन में देखा, उसे अपनी मेहनत से हकीकत में बदलकर आज उन्होंने कासिमपुर खेड़ी का नाम देश की सेवा से जोड़ दिया है


