राम मंदिर ट्रस्ट में फिर बढ़ा विवाद, चंपत राय के दूसरे पत्र में नृपेंद्र मिश्र की भूमिका पर उठे सवाल
चंपत राय ने दावा किया कि निर्माण समिति में नृपेंद्र मिश्र की पसंद के लोगों को शामिल किया गया था। उनके अनुसार, इनमें कुछ ऐसे सदस्य भी थे जो छह वर्षों के दौरान केवल एक-दो बार अयोध्या आए। उन्होंने पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वह लगातार नृपेंद्र मिश्र के साथ निर्माण समिति की बैठकों में शामिल होते थे।

अयोध्या: Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra: अयोध्या राम मंदिर निर्माण से जुड़े विवाद ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद चंपत राय ने गुरुवार को नौ पन्नों का दूसरा पत्र जारी किया। इस पत्र में उन्होंने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र की भूमिका को लेकर कई दावे किए हैं। चंपत राय ने मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों, निर्माण एजेंसियों के चयन और समिति की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी बात विस्तार से रखी है।
15 ट्रस्टियों के साथ शुरू हुई मंदिर निर्माण की प्रक्रिया
चंपत राय ने अपने पत्र में राम मंदिर निर्माण की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। ट्रस्ट में कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई थी। इनमें निर्मोही अखाड़े और अनुसूचित जाति/जनजाति प्रतिनिधित्व के लिए भी स्थान निर्धारित किए गए थे। उन्होंने बताया कि अयोध्या के जिलाधिकारी के साथ केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों को पदेन न्यासी बनाया गया। इसके बाद मंदिर निर्माण की निगरानी के लिए अलग व्यवस्था तैयार की गई और नृपेंद्र मिश्र को निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
L&T और डिजाइन फर्म के चयन का दावा
चंपत राय के मुताबिक, नृपेंद्र मिश्र के सुझाव पर लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। निर्माण की निगरानी के लिए टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) को चुना गया। वहीं, मंदिर परिसर में बनने वाले अन्य भवनों के डिजाइन और निर्माण संबंधी कार्यों के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म को जिम्मेदारी दी गई। चंपत राय ने दावा किया कि निर्माण समिति में नृपेंद्र मिश्र की पसंद के लोगों को शामिल किया गया था। उनके अनुसार, इनमें कुछ ऐसे सदस्य भी थे जो छह वर्षों के दौरान केवल एक-दो बार अयोध्या आए। उन्होंने पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वह लगातार नृपेंद्र मिश्र के साथ निर्माण समिति की बैठकों में शामिल होते थे।
‘समिति के फैसलों में बाद में बदलाव किए गए’
चंपत राय ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से संबंधित फैसले निर्माण समिति की बैठकों में लिए जाते थे, लेकिन कई मामलों में बाद में उनमें बदलाव किया गया। उनके अनुसार, कुछ मामलों में नृपेंद्र मिश्र के फैसलों को प्राथमिकता दी गई और समिति के अन्य सदस्यों के सुझावों या निर्णयों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। चंपत राय के इन दावों से मंदिर निर्माण की निर्णय प्रक्रिया और समिति की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों पर नृपेंद्र मिश्र की ओर से इन दावों का विस्तृत जवाब सामने आने की बात स्पष्ट नहीं है।
30 सितंबर तक मुख्य निर्माण पूरा होने का दावा
इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर अलग जानकारी दी है। उनके अनुसार, मंदिर परिसर में निर्माण कार्य 30 सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि L&T और टाटा से जुड़े लोग भी 30 अक्टूबर तक अपना काम पूरा कर वहां से चले जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजकीय निर्माण निगम की ओर से बनाए जा रहे ऑडिटोरियम और म्यूजियम का काम मुख्य मंदिर परिसर का निर्माण पूरा होने के बाद भी जारी रहेगा। इन दोनों परियोजनाओं के मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।
म्यूजियम की गैलरियों की स्क्रिप्ट तैयार
नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, प्रस्तावित म्यूजियम की सभी गैलरियों के लिए स्क्रिप्ट और कहानी तैयार की जा चुकी है। अब इन कहानियों को वीडियो के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए IIT मद्रास के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि म्यूजियम को अगले साल फरवरी-मार्च के आसपास दर्शकों के लिए खोले जाने की उम्मीद है। मंदिर परिसर के चारों ओर बनने वाली बाउंड्री वॉल को दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य भी बताया गया है।
चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन का भी किया जिक्र
अपने पत्र में चंपत राय ने राम जन्मभूमि से जुड़े लंबे कानूनी और सामाजिक संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1528 में मंदिर तोड़े जाने के बाद मंदिर की भूमि हासिल करने के लिए लंबे समय तक संघर्ष चला। उनके अनुसार, 1950 से 1989 के बीच स्थानीय अदालतों में चार मुकदमे दायर हुए। उन्होंने बताया कि बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता की कोशिश हुई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। 6 अगस्त 2019 से संविधान पीठ ने नियमित सुनवाई शुरू की और 9 नवंबर 2019 को सर्वसम्मति से फैसला सुनाया गया।
दर्शन और वित्तीय व्यवस्था का भी उल्लेख
चंपत राय ने पत्र में मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी। उनके मुताबिक, रामपथ पर यात्री सेवा केंद्र बनाया गया है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख करते हुए उन्होंने दर्शन के लिए आठ लाइनों की व्यवस्था बताई है। इनमें एक विशिष्ट दर्शन, एक सुगम/व्हीलचेयर दर्शन और छह सामान्य लाइनें शामिल हैं। असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त व्हीलचेयर की व्यवस्था का भी दावा किया गया है।
ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर चंपत राय ने कहा कि बैंक खातों में चेकबुक का इस्तेमाल नहीं किया जाता और भुगतान बैंक ट्रांसफर के जरिए किए जाते हैं। ट्रस्ट के खाते SBI, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं। उन्होंने बताया कि वित्तीय लेन-देन का आंतरिक और वैधानिक ऑडिट कराया जाता है। चंपत राय के दूसरे पत्र के सामने आने के बाद अब राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।


