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“खुले नाले में लटकी कार” : ग्रेटर नोएडा हादसा टला, प्राधिकरण पर सवाल

ईकोटेक-3 कोतवाली क्षेत्र के तुस्याना गांव के समीप शनिवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया

“युवराज हादसे से सबक नहीं” : ईकोटेक-3 में फिर खतरे का नाला

  • “गनीमत रही, मौत टली” : खुले नाले ने फिर दिखाया खतरा
  • “प्राधिकरण की लापरवाही उजागर” : हादसे ने खोली सुरक्षा दावों की पोल
  • “एक और त्रासदी टल गई” : खुले नाले बने मौत का जाल

ग्रेटर नोएडा। ईकोटेक-3 कोतवाली क्षेत्र के तुस्याना गांव के समीप शनिवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पुलिस के अनुसार, एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने खुले नाले में जा लटक गई। कार में सवार तीन लोगों को स्थानीय ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गनीमत रही कि कार नाले में पूरी तरह नहीं गिरी, अन्यथा गंभीर जनहानि हो सकती थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला। सूचना पर ईकोटेक 3 कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई की। हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन घटना ने एक बार फिर खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तुस्याना क्षेत्र में खुले नाले लंबे समय से खतरा बने हुए हैं। कई बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से नालों को ढकने और सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने इस घटना को सेक्टर-150 में हुए इंजीनियर युवराज हादसे से जोड़ते हुए कहा कि उस दर्दनाक घटना के बाद भी प्राधिकरण ने कोई सबक नहीं लिया है। युवराज की कार खुले नाले में गिर गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद खुले नालों को सुरक्षित करने के दावे किए गए थे, लेकिन तुस्याना की घटना ने उन दावों की हकीकत सामने ला दी है।

लोगों का कहना है कि अगर इस बार कार नाले में पूरी तरह गिर जाती तो एक और बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने प्राधिकरण से खुले नालों को तत्काल ढकने और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


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