ब्रजभूषण शरण सिंह का बड़ा आरोप- ‘WFI विवाद के पीछे हुड्डा परिवार की राजनीतिक साजिश थी, 42 लोग साजिश में शामिल थे’
ब्रजभूषण शरण सिंह ने दावा किया कि विवाद की शुरुआत 2012 के आसपास हुई, जब उन्होंने राष्ट्रीय कुश्ती संस्था के अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था। उनके मुताबिक, कांग्रेस नेता और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा ने भी इस पद के लिए चुनाव लड़ा था।

गोंडा: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने 2023 के पहलवान आंदोलन को लेकर बड़ा राजनीतिक आरोप लगाया है। सिंह ने दावा किया कि कुश्ती महासंघ में अपने विरोधी गुट को हराने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई। उन्होंने इस कथित साजिश के पीछे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवार का हाथ होने का आरोप लगाया। गोंडा के विश्नोहरपुर स्थित अपने आवास पर सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में सिंह ने 2023 के घटनाक्रम पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ था, बल्कि इसकी जड़ें करीब एक दशक पुराने राजनीतिक और संगठनात्मक टकराव में थीं।
2012 से चली आ रही दुश्मनी का किया दावा
ब्रजभूषण शरण सिंह ने दावा किया कि विवाद की शुरुआत 2012 के आसपास हुई, जब उन्होंने राष्ट्रीय कुश्ती संस्था के अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था। उनके मुताबिक, कांग्रेस नेता और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा ने भी इस पद के लिए चुनाव लड़ा था। सिंह का कहना है कि चुनाव के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक मतभेद बने रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि यही पुरानी प्रतिद्वंद्विता आगे चलकर उनके खिलाफ अभियान की वजह बनी। हालांकि, हुड्डा परिवार की ओर से लगाए गए इन ताजा आरोपों पर इस रिपोर्ट के लिए कोई तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
‘42 लोगों ने मिलकर रची साजिश’
पूर्व WFI अध्यक्ष ने दावा किया कि उनके खिलाफ कथित साजिश में करीब 42 लोग शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ उद्योगपतियों ने इस अभियान के लिए आर्थिक मदद की थी। सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए संगठनात्मक बदलावों का बचाव करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य खासतौर पर जूनियर पहलवानों को बेहतर अवसर देना था। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, मेडिकल छूट, प्रशिक्षण शिविरों और बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन ट्रायल से जुड़े बदलावों का उल्लेख किया। उनका दावा था कि कुछ पहलवान इन सुधारों का विरोध कर रहे थे, क्योंकि वे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की प्रक्रिया से गुजरे बिना बड़े आयोजनों में सीधे प्रवेश चाहते थे।
2023 में जंतर-मंतर पर हुआ था बड़ा आंदोलन
ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 2023 में कई महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके विरोध में पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति और खेल जगत में बड़ा विवाद पैदा कर दिया था। प्रदर्शन करने वाले पहलवानों ने सिंह के खिलाफ कार्रवाई और कुश्ती महासंघ में बदलाव की मांग की थी। मामला सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और मामले की जांच हुई।
अदालत के फैसले का भी किया जिक्र
सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज मामले में अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वह शुरू से खुद को निर्दोष बताते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अदालत के निर्णय ने उनके रुख की पुष्टि की है। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ताओं और गवाहों के बयानों में कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाया था। सिंह ने इसी आधार पर अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया।
विपक्षी दलों पर भी लगाए आरोप
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने पहलवानों के आंदोलन का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ महिला पहलवानों पर उनके खिलाफ आरोप लगाने का दबाव बनाया गया था। सिंह ने कहा कि पूरा विवाद धीरे-धीरे खेल प्रशासन से निकलकर राजनीतिक लड़ाई में बदल गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस विवाद का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पहलवानों की छवि पर पड़ा।


