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पंचायत निकायों के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, पांच सदस्यीय टीम नियुक्त

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के स्थानीय ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े मामलों के अध्ययन और सुझावों के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है

पंचायत निकायों के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, पांच सदस्यीय टीम नियुक्त
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के स्थानीय ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े मामलों के अध्ययन और सुझावों के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है। इस संबंध में पंचायतीराज अनुभाग-3 की ओर से बुधवार को अधिसूचना जारी की गई।

अधिसूचना के अनुसार, राज्यपाल की मंजूरी के बाद आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की गई है। आयोग के अध्यक्ष के रूप में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा आयोग में सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया तथा सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी एसपी सिंह को सदस्य बनाया गया है।

यह आदेश प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने दिया है। आदेश में कहा गया है कि अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से छह माह की अवधि के लिए प्रभावी रहेगी। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के मानदेय, भत्ते एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।

यह अधिसूचना पंचायतीराज अनुभाग-3 की पूर्व अधिसूचना संख्या 1274/33-3-2026 दिनांक 18 मई 2026 के तहत किए गए प्रावधानों के क्रम में जारी की गई है।

ज्ञात हो प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को देखते हुए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी थी।

माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायत चुनाव में आरक्षण का अंतिम खाका तय किया जाएगा। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, आयोग निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। आवश्यकता पड़ने पर सरकार आयोग के कार्यकाल अथवा रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा में विस्तार भी कर सकेगी। आयोग पंचायतों में पिछड़ा वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े आंकड़ों एवं संवैधानिक प्रावधानों का परीक्षण करेगा।


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