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बाबा रामदेव का विपक्ष पर करारा प्रहार! 'भगवा और प्रभु राम का उपहास बनाना अक्षम्य अपराध'

योग गुरु बाबा रामदेव ने शनिवार को कहा कि भगवा, संतों, भगवान राम या सनातन विरासत के किसी भी पहलू का अपमान करना बेहद आपत्तिजनक है और यह एक गंभीर अपराध है।

बाबा रामदेव का विपक्ष पर करारा प्रहार! भगवा और प्रभु राम का उपहास बनाना अक्षम्य अपराध
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नोएडा। योग गुरु बाबा रामदेव ने शनिवार को कहा कि भगवा, संतों, भगवान राम या सनातन विरासत के किसी भी पहलू का अपमान करना बेहद आपत्तिजनक है और यह एक गंभीर अपराध है।

यह बयान शुक्रवार को संसद में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के एक अनोखे विरोध प्रदर्शन के जवाब में आया।

यादव भगवा कपड़े पहनकर आए थे और उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान की कथित चोरी का नाटक किया। यादव के साथ विपक्ष के कई सांसद भी शामिल हुए और उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की।

इस सांकेतिक विरोध के तहत, विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई सांसदों को दान पेटी में पैसे डालते देखा गया, जबकि यादव ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के कथित गबन को दिखाने के लिए सांकेतिक रूप से पैसे अपनी जेब में डाल लिए।

यह प्रदर्शन एक नुक्कड़ नाटक की तरह किया गया। विपक्ष के सांसदों ने श्रद्धालुओं की भूमिका निभाई और दान पेटी में दान डालने के लिए आगे आए। नाटक के दौरान, पुजारी की भूमिका निभा रहे पप्पू यादव ने दान पेटी में पैसे डालने के बजाय कथित तौर पर पैसे अपनी जेब में रख लिए। इसके बाद, श्रद्धालु की भूमिका निभा रहे सपा के एक सांसद ने इस सांकेतिक गैर-कानूनी हरकत पर उनसे सवाल किया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा रामदेव ने आईएएनएस से से ​​कहा, "भगवा, संतों, भगवान राम या हमारी सनातन विरासत के किसी भी हिस्से का अपमान करना बेहद आपत्तिजनक और गंभीर अपराध है।"

जब उनसे नीट पेपर लीक को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन और ऐसे प्रदर्शनों की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, इस बारे में पूछा गया, तो बाबा रामदेव ने कहा कि अपशब्दों का इस्तेमाल भारतीय संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि अपशब्दों का इस्तेमाल भारत की संस्कृति या मूल्यों का हिस्सा नहीं है। हमें अपने बच्चों को अपशब्द बोलने वाला नहीं, बल्कि कुशल बनाना चाहिए। उन्हें नशे का आदी, ड्रग्स लेने वाला, घर से भागने वाला या विनाशकारी सोच वाला नहीं बनना चाहिए। इसके बजाय, उनमें रचनात्मक सोच विकसित होनी चाहिए।

रामदेव ने कहा कि हमारा नजरिया समस्या-केंद्रित नहीं, बल्कि समाधान-केंद्रित होना चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह रहना चाहिए और नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। देश भर में ऐसी सोच पैदा करना सभी बड़ों की जिम्मेदारी है। हर माता-पिता और समाज के हर जिम्मेदार सदस्य को ऐसा माहौल बनाने में योगदान देना चाहिए।

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि जब विरोध प्रदर्शन अराजकता में बदल जाते हैं, तो वे अपना मकसद खो देते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर कोई आंदोलन अराजक हो जाता है, तो उसका कोई सार्थक नतीजा नहीं निकलता। इसके बजाय, आंदोलन खत्म होने के बाद, इसमें शामिल लोगों के लिए अक्सर लंबी अवधि की समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इसलिए, विरोध के नाम पर किसी भी तरह की अराजकता बंद होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर हमें किसी चीज का विरोध करना है, तो यह मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से किया जाना चाहिए। हर आंदोलन का मकसद सकारात्मक नतीजा हासिल करना होना चाहिए।



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