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आजम खान की बढ़ीं मुश्किलें: जौहर यूनिवर्सिटी मामले में रामपुर के अजीमनगर थाने में नया मुकदमा दर्ज

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित तौर पर सरकारी धन और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल से जुड़े मामले में रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

आजम खान की बढ़ीं मुश्किलें: जौहर यूनिवर्सिटी मामले में रामपुर के अजीमनगर थाने में नया मुकदमा दर्ज
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रामपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित तौर पर सरकारी धन और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल से जुड़े मामले में रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजी गई जांच संबंधी जानकारी के आधार पर 13 अक्टूबर को दर्ज इस मुकदमे में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7, 13(1)(d) और 13(2) शामिल हैं। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ जांच से संबंधित जानकारी साझा की थी। एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच करेगी।

ईडी के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में इमारतों के निर्माण की अनुमानित लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच कुल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दर्शाया गया है। एजेंसी ने इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर होने का दावा किया है। जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी कार्यों के लिए जारी धनराशि और निर्माण सामग्री का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।

ईडी ने अपनी शिकायत में करीब 55.8 करोड़ रुपये के ठेकेदारों से जुड़े निर्माण कार्यों, 23.41 करोड़ रुपये के सरकारी कार्यों और 6.60 करोड़ रुपये के विधायक एवं विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से संबंधित कार्यों का उल्लेख किया है। इन सभी मदों की कुल राशि करीब 85.81 करोड़ रुपये बताई गई है। ईडी ने ट्रस्ट को मिले कुछ दान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाए हैं।

एजेंसी को आशंका है कि ठेकेदारों के माध्यम से कुछ रकम ट्रस्ट तक पहुंचाई गई और उसे दान के रूप में दर्शाया गया। जांच के दौरान संबंधित लोगों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन तथा निर्माण सामग्री के कथित इस्तेमाल की पड़ताल की गई। इस मामले में आजम खां, ट्रस्ट, संबंधित ठेकेदारों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी जांच के विषय हैं।


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