राम मंदिर चढ़ावा चोरी में FIR कराने पहुंचे थे चंपत राय, एक फोन कॉल के बाद वापस लौट आए, जानें पूरी कहानी
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे थे, लेकिन वहां ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने फोन पर उनकी किसी व्यक्ति से बातचीत कराई। इसके बाद कथित तौर पर चंपत राय बिना लिखित शिकायत दिए वापस लौट आए।

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब एक नया दावा सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दान राशि में कथित गड़बड़ी का मामला 27 मई को ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट और स्थानीय पुलिस के संज्ञान में आ गया था। रिपोर्ट के अनुसार, सूचना मिलते ही पुलिस ने लवकुश, मनीष यादव, करुणेश, रामशंकर समेत छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ भी की।वहीं, मामले की जांच फिलहाल प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस की ओर से की जा रही है।
एफआईआर दर्ज न होने के दावे पर बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे थे, लेकिन वहां ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने फोन पर उनकी किसी व्यक्ति से बातचीत कराई। इसके बाद कथित तौर पर चंपत राय बिना लिखित शिकायत दिए वापस लौट आए। इस दावे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि मामला मई के अंत में ही सामने आ गया था तो इसकी औपचारिक शिकायत तत्काल क्यों दर्ज नहीं कराई गई। फिलहाल इस संबंध में ट्रस्ट या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
राजनीतिक मुद्दा बनने के बाद आई तेजी
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के सार्वजनिक न होने के बाद करीब दस दिन तक मामला चर्चा से बाहर रहा। इसके बाद 7 जून को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने इस मुद्दे को उठाया। अगले दिन 8 जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामले पर सवाल खड़े किए। इसके बाद यह प्रकरण राजनीतिक बहस का विषय बन गया और राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे। बाद में प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की और पुलिस ने भी अलग से जांच शुरू की।
आरोपियों से जेल में पूछताछ, कई दावों की जांच
पुलिस ने न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद मंगलवार को जेल में बंद आरोपियों से लगभग दो घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, सबसे लंबी पूछताछ अवनीश शुक्ला से की गई, क्योंकि कथित तौर पर सबसे अधिक बरामदगी उसी से हुई थी। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दान राशि की चोरी में अपनी भूमिका स्वीकार करते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पूछताछ के दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी सामने आने का दावा किया गया। हालांकि, इन बयानों की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों की ओर से नहीं की गई है और मामले की जांच जारी है।
चोरी का तरीका भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गणना कक्ष की एक चाबी कथित रूप से टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मचारियों के पास होती थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था। बताया गया कि सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जानकारी होने के कारण आरोपी कैमरों की सीधी नजर से बचकर नकदी निकालते थे। कथित तौर पर एक व्यक्ति रकम निकालता था, जबकि अन्य उसे चारों ओर से घेर लेते थे ताकि कैमरे में गतिविधि स्पष्ट दिखाई न दे। इसके बाद नकदी को अस्थायी रूप से बाथरूम में छिपाकर मौका मिलने पर बाहर ले जाया जाता था। इन दावों की पुष्टि भी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
बैंक खातों और संपत्तियों की जांच जारी
जांच एजेंसियां अब आरोपियों और उनके परिजनों के बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस और एसआईटी ने विभिन्न बैंकों से खातों का विवरण मांगा है। प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर कई खातों में आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में कहीं अधिक राशि के लेनदेन की जानकारी मिली है। इसके अलावा आरोपियों के मकानों, प्लॉट, हॉस्टल और अन्य संपत्तियों का भी रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन संपत्तियों के लिए धन का स्रोत क्या था और क्या उनका संबंध कथित चोरी की रकम से है।
टिन्नू यादव के हॉस्टल और संपत्तियों की पड़ताल
सूत्रों के अनुसार, जांच दल ने टिन्नू यादव से जुड़े हॉस्टल के दस्तावेज भी एकत्र किए हैं। अब इन दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित संपत्तियों में निवेश के लिए धन कहां से आया। यदि वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों के बीच कोई संबंध मिलता है तो उसे जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक पर नजर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 6 जुलाई को होने की संभावना है। पहले यह बैठक 7 जुलाई को प्रस्तावित बताई गई थी, लेकिन ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार अब इसे एक दिन पहले आयोजित किया जा सकता है। बैठक में मौजूदा विवाद, जांच की प्रगति और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ पदाधिकारियों के भविष्य को लेकर भी विचार-विमर्श हो सकता है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से बैठक के एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
जांच पूरी होने का इंतजार
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण अब केवल एक आपराधिक जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसकी पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर, जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएंगे। ऐसे में इस बहुचर्चित मामले में आगे होने वाली कार्रवाई और एसआईटी की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


