राम मंदिर चढ़ावा मामले में दानराशि की गिनती में SBI की भूमिका पर उठे सवाल, जांच में आउटसोर्सिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2021-22 के दौरान SBI ने दानराशि की गणना का कार्य सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज को सौंपा था। यह भी दावा किया जा रहा है कि एजेंसी के चयन के दौरान सामान्य प्रतिस्पर्धी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और अन्य कंपनियों से प्रस्ताव नहीं मांगे गए।

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित चोरी के मामले की जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मंदिर में प्रतिदिन आने वाली बड़ी मात्रा में नकदी की गणना का कार्य एक निजी एजेंसी को सौंपा गया था। इस प्रक्रिया में अपनाई गई व्यवस्था और बैंक की निगरानी प्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह मामला सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल (JIT) की रिपोर्ट में भी उल्लेखित है। हालांकि, रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से जारी हुई है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
बिना प्रतिस्पर्धी निविदा के एजेंसी को मिला काम
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2021-22 के दौरान SBI ने दानराशि की गणना का कार्य सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज को सौंपा था। यह भी दावा किया जा रहा है कि एजेंसी के चयन के दौरान सामान्य प्रतिस्पर्धी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और अन्य कंपनियों से प्रस्ताव नहीं मांगे गए। उल्लेखनीय है कि संबंधित एजेंसी का मुख्य कार्य सुरक्षा, हाउसकीपिंग और मानव संसाधन उपलब्ध कराना बताया जाता है। ऐसे में इतनी संवेदनशील वित्तीय जिम्मेदारी उसे सौंपे जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बैंकिंग विशेषज्ञों ने जताई चिंता
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी मात्रा में नकदी की गिनती अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है और इसे प्रशिक्षित तथा जवाबदेह कर्मचारियों की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कार्यों में पारदर्शिता, आंतरिक नियंत्रण और कर्मचारियों का सत्यापन (Background Verification) महत्वपूर्ण होता है। यदि यह प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं अपनाई गई हो, तो वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ सकती है।
कोर और नॉन-कोर बैंकिंग प्रक्रिया पर भी चर्चा
बैंकिंग व्यवस्था में सामान्यतः कार्यों को कोर बैंकिंग और नॉन-कोर बैंकिंग गतिविधियों में विभाजित किया जाता है। कोर बैंकिंग में नकद जमा-निकासी, चेक भुगतान, नकदी प्रबंधन और अन्य वित्तीय लेनदेन शामिल होते हैं, जिन्हें आमतौर पर अधिकृत बैंक कर्मचारी ही संचालित करते हैं। वहीं सुरक्षा, हाउसकीपिंग और सहायक सेवाएं नॉन-कोर श्रेणी में आती हैं और इन्हें आवश्यकता पड़ने पर आउटसोर्स किया जा सकता है। इसी आधार पर विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि दानराशि की गणना जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी किस प्रक्रिया के तहत बाहरी एजेंसी को सौंपी गई।
SOP और ऑडिट प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
बैंक से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure - SOP) का पूरी तरह पालन किया जाता और नियमित ऑडिट समय पर होता, तो किसी भी संभावित गड़बड़ी का समय रहते पता लगाया जा सकता था। विशेषज्ञों के अनुसार, आदर्श व्यवस्था में पहले मंदिर ट्रस्ट के अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्राथमिक गणना होनी चाहिए। इसके बाद बैंक अधिकारी पुनर्गणना (Recounting) कर राशि का सत्यापन करें और अंत में ट्रस्ट को आधिकारिक रसीद जारी की जाए। पूरी प्रक्रिया का विस्तृत दस्तावेजी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
बैंक की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
मामले में SBI की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किए जाने पर उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि फिलहाल इस मामले में कोई अधिकृत बयान जारी नहीं किया जा सकता।
जांच के बाद स्पष्ट होगी जवाबदेही
पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दानराशि की गिनती जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किसी आउटसोर्स एजेंसी को दी गई थी, तो उसकी निगरानी और जवाबदेही किसकी थी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या बैंक की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली, जोखिम प्रबंधन और ऑडिट व्यवस्था ने समय रहते किसी संभावित अनियमितता की पहचान की थी या नहीं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया में कहीं लापरवाही हुई थी या नियमों का उल्लंघन हुआ था। जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर सामने आना बाकी हैं।


