इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द की, 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
मामला अप्रैल की शुरुआत में नोएडा में हुए बड़े मजदूर आंदोलन से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 40 हजार से अधिक फैक्ट्री वर्कर्स इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे। मजदूर बेहतर वेतन और काम की परिस्थितियों में सुधार की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद हिंसा के आरोप सामने आए।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा में मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में ली गई 25 वर्षीय आकृति चौधरी को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए हिरासत आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर आकृति किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। आकृति पिछले करीब पांच महीने से हिरासत में थीं। उन्हें अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान भीड़ को कथित तौर पर हिंसा के लिए उकसाने के आरोप में NSA के तहत हिरासत में लिया गया था।
‘गढ़ी हुई कहानी’ पर आधारित थी हिरासत: हाई कोर्ट
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने आकृति की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए हिरासत की प्रक्रिया और राज्य की ओर से पेश सामग्री की जांच की। अदालत ने पाया कि हिरासत का आधार राज्य की ओर से पेश की गई एक कथित ‘गढ़ी हुई कहानी’ पर आधारित था।पीठ ने आकृति की गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित दावों में विसंगतियों के साथ-साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत जारी नोटिस की प्रक्रिया में भी खामियां पाईं। इन आधारों पर अदालत ने हिरासत आदेश को रद्द कर दिया।
पांच लाख रुपये मुआवजे का निर्देश
आकृति चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस के साथ अधिवक्ता चार्ली प्रकाश और माणिक गुप्ता ने अदालत में पक्ष रखा। वकीलों के मुताबिक, कोर्ट ने नोएडा के जिलाधिकारी को आकृति को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अधिवक्ता माणिक गुप्ता के अनुसार, अदालत ने निर्देश दिया है कि हिरासत की कार्रवाई में शामिल अधिकारियों के वेतन से पांच लाख रुपये की राशि काटकर मुआवजे के रूप में आकृति को दी जाए। इसमें डीएम से लेकर एसएचओ स्तर तक के अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
40 हजार से ज्यादा मजदूरों का प्रदर्शन
मामला अप्रैल की शुरुआत में नोएडा में हुए बड़े मजदूर आंदोलन से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 40 हजार से अधिक फैक्ट्री वर्कर्स इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे। मजदूर बेहतर वेतन और काम की परिस्थितियों में सुधार की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद हिंसा के आरोप सामने आए।प्रदर्शन के करीब एक महीने बाद आकृति चौधरी और लखनऊ के पूर्व पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई थी। आकृति ने अपनी हिरासत को अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जरिए चुनौती दी थी।
दुर्गापुर से दिल्ली तक का सफर
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली आकृति ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू की थी। परिवार के मुताबिक, वह दिल्ली में रहकर UPSC परीक्षा की तैयारी करने की योजना बना रही थीं। आकृति के पिता के अनुसार, वह अपने कमरे का करीब 14 हजार रुपये किराया देने के बाद बाकी खर्चों को पूरा करने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थीं। परिवार का कहना है कि आकृति सामाजिक मुद्दों में रुचि रखती थीं और लोगों की मदद करने के लिए आगे आती थीं।
थिएटर और शिक्षा से भी जुड़ी थीं आकृति
आकृति की कॉलेज की सीनियर और दोस्त नौरीन सब्बा के मुताबिक, वह थिएटर से भी जुड़ी हुई थीं और नुक्कड़ नाटकों का निर्देशन व निर्माण करती थीं। 23 मार्च को शहीद दिवस के अवसर पर उन्होंने शाहबाद डेयरी में एक नाटक का निर्देशन किया था। सब्बा के मुताबिक, आकृति ऐसे बच्चों को भी पढ़ाती थीं जिनके परिवार महंगी प्रवेश परीक्षा की कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे। उन्होंने जरूरतमंद छात्रों को समय निकालकर पढ़ाने में मदद की।


