Top
Begin typing your search above and press return to search.

मादक पदार्थो की तस्करी रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने नहीं की पर्याप्त कोशिश: भारत

भारत ने मादक पदार्थो की तस्करी रोकने के लिए विश्व निकाय द्वारा पर्याप्त कोशिश नहीं किए जाने की आलोचना की है

मादक पदार्थो की तस्करी रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने नहीं की पर्याप्त कोशिश: भारत
X

संयुक्त राष्ट्र। भारत ने मादक पदार्थो की तस्करी रोकने के लिए विश्व निकाय द्वारा पर्याप्त कोशिश नहीं किए जाने की आलोचना की है। भारत का मानना है कि इससे तालिबान को एक अरब डॉलर से ज्यादा का वित्तपोषण हो रहा है, जिससे वह अफगानिस्तान के पड़ोसी देश की सहायता से अपना सैन्य अभियान जारी रख पा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने सोमवार को सुरक्षा परिषद में वहां की स्थिति पर बहस के दौरान यह बात कही।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में संचालित आतंकी संगठनों को मादक पदार्थ तस्करी गिरोह चलाने वाले आपराधिक नेटवर्को से काफी लाभ होता है और वे इस तरह अफगानिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों की चोरी कर रहे हैं।

अकबरुद्दीन ने कहा, "तालिबान के नियंत्रण वाले इलाकों में उत्पादित अफीम की मात्रा इस मादक पदार्थ के अवैध वैश्विक उत्पादन का 85 प्रतिशत है, जिसकी कीमत 1.5 अरब डॉलर से तीन अरब डॉलर के बीच है।"

उन्होंने कहा, "कुछ अनुमानों के मुताबिक, तालिबान के राजस्व का 60 प्रतिशत हिस्सा मादक पदार्थ तस्करी के जरिए प्राप्त होता है। तालिबान के कब्जे वाले क्षेत्र में अफीम की खेती को सबसे बड़ी नगदी फसल माना जाता है।"

अकबरुद्दीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक मादक पदार्थ तस्करी पर व्यापक ध्यान नहीं दिया है, जो कि तालिबान और अन्य आतंकवादी संगठनों का वित्तपोषण कर रहा है।

उन्होंने कहा, "2018 के आरंभ में सुरक्षा परिषद का एक प्रस्ताव अफगानिस्तान में आतंकवाद, मादक पदार्थ और प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के बीच की सांठगांठ पर केंद्रित था, लेकिन यह 'तालिबान की मादक पदार्थ तस्करी पर लगाम लगाने की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका'।"

उन्होंने कहा कि महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की ताजा रपट भी 'सही तरीके से महत्वपूर्ण मुद्दे को सुलझाने में नाकाम रही है।'

अकबरुद्दीन ने इराक व सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट(आईएस) से लड़ने के अनुभवों का हवाला दिया, जहां अंतर्राष्ट्रीय ताकतों ने इसके तेल व्यापार को 90 प्रतिशत तक कम कर दिया, जोकि प्रतिमाह पांच करोड़ डॉलर से घटकर 40 लाख डॉलर तक आ गया है।

उन्होंने कहा, "आईएस के विरुद्ध सफल अंतर्राष्ट्रीय अभियान को तालिबान के विरुद्ध अफगानिस्तान में मादक पदार्थ तस्करी के संबंध में दोहराना चाहिए।"

पाकिस्तान का नाम लिए बिना अकबरुद्दीन ने हमलों की साजिश रचने और अंजाम देने के लिए सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने पर पाकिस्तान पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, "इन पनाहगाहों ने वर्षो से विचारधारा व संचालन से जुड़े आतंकी नेटवर्क जैसे तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अलकायदा और इससे जुड़े संगठन जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के अंधे एजेंडों को सुरक्षा मुहैया कराया है।"

अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत अफगानिस्तान को मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है और देश का 'ध्यान वहां स्थिरता के आर्थिक स्तंभ और भरोसेमंद कनेक्टिविटी पर बना हुआ है।'

उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि अफगानिस्तान में कनेक्टिविटी के अभाव का प्रभाव सीधे अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति पर पड़ेगा और हम अफगान लोगों की भलाई के लिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं।"


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it