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अंतत: भालू को मार डाला पर नहीं बचा सका अपनी जान

कोरबा-रजगामार ! तेजी से कटते और घटते जंगल के कारण आबादी क्षेत्र के निकट पहुंच रहे जंगली जानवरों की इंसानों के साथ मुठभेड़ होने लगी है।

अंतत: भालू को मार डाला पर नहीं बचा सका अपनी जान
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कोरबा-रजगामार ! तेजी से कटते और घटते जंगल के कारण आबादी क्षेत्र के निकट पहुंच रहे जंगली जानवरों की इंसानों के साथ मुठभेड़ होने लगी है। ग्राम डूमरडीह के निकट जंगल में एक ऐसी ही मुठभेड़ में वृद्ध ने अपनी जान बचाने भालू से अंतिम सांस तक संघर्ष किया और अंतत: भालू को तो मार डाला लेकिन समय पर कोई सहायता नहीं मिलने के कारण अपनी भी जान नहीं बचा सका।
जानकारी के अनुसार रजगामार पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम डूमरडीह का निवासी लच्छीराम कंवर पिता नान्हीराम कंवर 65 वर्ष 15 फरवरी की सुबह से कहीं चला गया था। परिवार में एक बच्ची के निधन के कारण परिजन औैर रिश्तेदार कामकाज में व्यस्त थे। जब इससे निपटे तो लच्छीराम के घर पर नहीं होने का पता चला। उसकी तलाश सभी संभावित ठिकानों पर की गई और बाद में पुलिस चौकी में गुमशुदगी की सूचना पुत्र मनीराम कंवर 30 वर्ष ने दर्ज कराई। पता, तलाश के मध्य आज सुबह करीब 9 बजे गांव के चरवाहा एलेस्टर लकड़ा ने बस्ती से लगभग 400 मीटर की दूरी पर नाला के पार तेज बदबू उठने पर वहां जाकर देखा तो एक भालू का शव और कुछ ही दूरी पर लच्छीराम की क्षत-विक्षत लाश पड़ी थी। एलेस्टर ने तत्काल लच्छीराम के परिजनों को सूचना दी और पुलिस को भी अवगत कराया। भालू की मौत के मामले में वन विभाग को भी सूचना दी गई। मौके पर रजगामार चौकी प्रभारी एसआई प्रेमनाथ बघेल मातहतों के साथ पहुंचे और मर्ग पंचनामा बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। वनकर्मियों द्वारा भालू के शव का पंचनामा व पोस्टमार्टम बाद मौके पर ही अंतिम संस्कार किया गया।
घटना के संबंध में चौकी प्रभारी ने बताया कि भालू के द्वारा वृद्ध लच्छीराम पर हमला किया गया था जिससे उसके जबड़े और शरीर के अन्य हिस्से में गहरे जख्म बने हैं।
भालू से जान बचाने लच्छीराम ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। मौैके पर मिले भालू व लच्छीराम के बीच संघर्ष के निशान के आधार पर बताया कि संभवत: लच्छीराम भालू के हमले से जब पस्त हो गया तब उसे अपने जबड़े में फंसाकर भालू मांद की ओर जा रहा था कि इससे पहले वृद्ध ने पूरी ताकत से अपनी जान बचाने आसपास पड़े पत्थर से भालू के सिर पर संघातिक वार किया और उसके चंगुल से खुद को छुड़ाया होगा। मांद के बाहर ही भालू का शव मिला है। चंगुल से निकलकर गांव की ओर जाने के प्रयास में किसी तरह की मदद व सहारा नहीं मिलने तथा अत्यधिक रक्त स्राव के कारण वृद्ध ने भी दम तोड़ दिया।


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