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उज्ज्वला के सिलेण्डर खाली जला रहे लकड़ी के चूल्हे

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जिले के करीब 3 लाख बीपीएल परिवार को 2 सौ रूपए में गैस कनेक्शन दिये जाने को लेकर सरकारी महकमा ने खूब वाहवाही लूटी है

उज्ज्वला के सिलेण्डर खाली जला रहे लकड़ी के चूल्हे
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जांजगीर। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जिले के करीब 3 लाख बीपीएल परिवार को 2 सौ रूपए में गैस कनेक्शन दिये जाने को लेकर सरकारी महकमा ने खूब वाहवाही लूटी है।

मगर इस योजना को लेकर हितग्राहियों में मायूसी स्पष्ट देखी जा रही है, जो दिन ब दिन महंगी हो रही गैस रिफिलिंग से परेशान है। लोगों की माने तो सरकार ने 2 सौ में कनेक्शन के बहाने उनका मिट्टी तेल का कोटा छिनने का अभियान छेड़ रखा है। ऐसे में अब एक बार फिर इन्हें खाना पकाने कंडे व लकड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।

सरकार द्वारा उज्ज्वला योजना के तहत गरीब तबके के लोगों को 2 सौ रूपए में कनेक्शन बांटने का क्रम गत वर्ष से चलाया जा रहा है। इस योजना के तहत जिले के करीब 3 लाख बीपीएल परिवारों को कनेक्शन दिये जाने का लक्ष्य रखा गया था। जो वर्ष 2016-17 व 2017-18 में पूरा करना है। इसके विरूद्ध अब तक जिले भर में 1 लाख 24 हजार बीपीएल परिवार के घरों में कनेक्शन दिया जा चुका है और करीब इतने ही उपभोक्ता कतार में है। जिन्हें गैस कनेक्शन तो जारी नहीं हुआ है मगर इन्हें सहकारी सोसायटी से राशनकार्ड के माध्यम से मिलने वाला मिट्टी तेल का कोटा खत्म कर दिया गया है।

ऐसा एसबी जारी होने की वजह से होने की बात खाद्य विभाग कह रहा है। ऐसे में इन परिवारों को जब तक गैस कनेक्शन नहीं मिल जाता, तब तक रसोई में कंडे और लकड़ी से ही खाना पकाना पड़ेगा। हालांकि दिन ब दिन बढ़ रही रसोई गैस के दाम से इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भविष्य में भी इन परिवारों द्वारा लकड़ी व कंडे का उपयोग होता रहेगा। क्योंकि तंगहाली में गुजर करने वाले परिवार को 8 सौ रूपए प्रतिमाह गैस रिफिलिंग कराना शायद ही गंवारा हो। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में गैस एजेंसी का अभाव भी एक बड़ा कारण हो सकता है।

जिनके घरों में संसाधन है वो किसी तरह शहर से सिलेण्डर मंगा काम चला लेते है, मगर संसाधन विहिन परिवार दूर शहर से गैस सिलेण्डर रिफिल कराने का झंझट मोल लेना नहीं चाहते। यही वजह है कि अब तक उज्ज्वला योजना के तहत वितरित कनेक्शनधारियों में से महज 38 से 40 फीसदी ही रिफिल करा रहे है। शेष 60 से 62 प्रतिशत हितग्राही परम्परागत कंडे व लकड़ी से ही खाना पका रहे है। जो न केवल सस्ता पड़ रहा है, बल्कि गांवों में आसानी से उपलब्ध भी है।

ऐसे में इन परिवारों को धुंए से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरित असर की समझाईश काम नहीं आ रही है। खाद्य विभाग को इस पर गौर करने की आवश्यकता है, ताकि प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी योजना का लाभ हितग्राहियों को सीधे मिल सके, इसके लिए गैस रिफिलिंग की सुविधा गांवों तक पहुंचाने गांव-गांव में शीघ्र रिफिलिंग एजेंसी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले धुंए के विपरित प्रभाव से भी छुटकारा मिलेगा।

सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से मिल सकता है रिफिल

उज्ज्वला योजना को बीपीएल परिवार तक पहुंचाने सबसे जरूरी है, गैस रिफिल की उपलब्धता। फिलहाल गांव-गांव में लाखों बीपीएल परिवारों को कनेक्शन तो दे दिया गया है, मगर रिफिल की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के चलते 60 से 62 प्रतिशत हितग्राही समय पर रिफिल नहीं करा पा रहे है।

जिसकी प्रमुख वजह शहरों तक गैस एजेंसी का सिमटकर रह जाना है, ऐसे में हितग्राहियों को गैस आसानी से उपलब्ध कराने गांवों में नई एजेंसी खोले जाने की आवश्यकता बनी हुई है, जो जटिल प्रक्रिया के चलते जल्द संभव नहीं, ऐसे में गांव-गांव में संचालित सेवा सहकारी समिति के माध्यम से हितग्राहियों को गैस वितरण का माध्यम बनाया जा सकता है।


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