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युवा, महिला और बुजुर्ग परेशान, ओडिशा सरकार जश्न में व्यस्त: ओपीसीसी अध्यक्ष

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने और केंद्रपाड़ा जिले में एक महिला सरपंच के कथित उत्पीड़न व गिरफ्तारी के मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है

युवा, महिला और बुजुर्ग परेशान, ओडिशा सरकार जश्न में व्यस्त: ओपीसीसी अध्यक्ष
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भुवनेश्वर। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने और केंद्रपाड़ा जिले में एक महिला सरपंच के कथित उत्पीड़न व गिरफ्तारी के मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि प्रदेश में युवा, महिला और बुजुर्ग हर कोई परेशान है और सरकार जश्न मनाने में जुटी है।

ओडिशा में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों पर टिप्पणी करते हुए भक्त चरण दास ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी उपलब्धियों का उत्सव मना रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कई श्रमिक बाहर काम करने के लिए मजबूर हैं और उनकी स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को समय पर पेंशन नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों और बढ़ते सामाजिक तनाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हुई है और विभिन्न स्तरों पर समस्याएं बढ़ रही हैं।

भक्त चरण दास ने यह भी कहा कि पंचायत राज व्यवस्था के अधिकारों में कटौती की गई है और स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका सीमित कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता की कमी है और योग्य लोगों की जगह अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति की जा रही है, जिससे संस्थागत गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों में भी राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा है, जिससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन वर्तमान में इसमें गिरावट देखी जा रही है।

केंद्रपाड़ा जिले के महाकालपाड़ा ब्लॉक की तिखिरी ग्राम पंचायत की सरपंच चमेली ओझा के मामले पर बोलते हुए ओपीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना को स्वीकृति मिली थी तो उसका समय पर क्रियान्वयन और धनराशि जारी करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार गलत है और अधिकारियों को जनता की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपनी बात रख रहा है, तो उसे सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए, न कि टकराव की स्थिति पैदा की जानी चाहिए।

भक्त चरण दास ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में सरपंच के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और उनका मोबाइल फोन छीने जाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं किया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरपंच चमेली ओझा पर दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

भक्त चरण दास ने पश्चिम बंगाल में 4000 ईवीएम जलने की घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। देश में चुनाव प्रणाली और लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईवीएम से जुड़े विवादों के कारण लोगों में अविश्वास का माहौल बन रहा है और ऐसे मामलों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। सत्ता में बने रहने के लिए विभिन्न वर्गों और समुदायों के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इन मूल्यों पर दबाव देखा जा रहा है।


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