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ओडिशा : 30 मई से घर-घर जाकर सत्यापन के साथ एसआईआर अभियान की शुरुआत

ओडिशा में शनिवार से मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होगा। इसके तहत बूथ-लेवल अधिकारी (बीएलओ) पूरे राज्य में घर-घर जाकर सत्यापन अभियान चलाएंगे

ओडिशा : 30 मई से घर-घर जाकर सत्यापन के साथ एसआईआर अभियान की शुरुआत
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नई दिल्ली। ओडिशा में शनिवार से मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होगा। इसके तहत बूथ-लेवल अधिकारी (बीएलओ) पूरे राज्य में घर-घर जाकर सत्यापन अभियान चलाएंगे, ताकि वे गणना फॉर्म वितरित कर सकें, निवासियों को उन्हें भरने में सहायता कर सकें और भरे हुए फॉर्म वापस जमा कर सकें।

पत्रकारों से बात करते हुए, मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आर.एस. गोपालन ने शुक्रवार को कहा कि 30 मई से शुरू होने वाली घर-घर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया 28 जून तक पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान बीएलओ सुबह के समय मतदाताओं के घरों का दौरा करेंगे और प्रत्येक मतदाता को गणना फॉर्म उपलब्ध कराएंगे।

इन फॉर्म में मतदाता की व्यक्तिगत जानकारी, पारिवारिक विवरण और 2002 की मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इन दौरों के दौरान बीएलओ जानकारी का सत्यापन करेंगे और जहां भी जरूरी होगा, छोटी-मोटी त्रुटियों को ठीक करेंगे।

सीईओ ने बीएलओ को निर्देश दिया है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी योग्य भारतीय मतदाता छूट न जाए और कोई भी अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।

गोपालन ने बताया कि मतदाता सूची का मसौदा 5 जुलाई को प्रकाशित किया जाएगा। दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 5 जुलाई से 4 अगस्त तक तय की गई है।

इसी तरह, दावों और आपत्तियों के निपटारे तथा नोटिस की अवधि 5 जुलाई से 2 सितंबर तक जारी रहेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर, 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

बीएलओ को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे के बीच अपने-अपने मतदान केंद्रों पर मौजूद रहें, ताकि मतदाता अपने फॉर्म सीधे मतदान केंद्र पर भी जमा कर सकें। एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए पूरे राज्य में 45,255 बीएलओ तैनात किए गए हैं। इस कार्य के लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है।

सीईओ ने यह भी बताया कि इसके अतिरिक्त अब तक 33,000 बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त किए जा चुके हैं और वे वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। मतदाताओं की सहायता के लिए हेल्प डेस्क भी सक्रिय कर दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि जो मतदाता डिजिटल माध्यम को प्राथमिकता देते हैं, वे गणना फॉर्म सीधे चुनाव आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं और भरे हुए फॉर्म को ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की पूछताछ के लिए निवासी समर्पित बीएलओ ऐप के माध्यम से अपने स्थानीय बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं।

तार्किक विसंगतियों या त्रुटियों और दस्तावेजी प्रमाणों से जुड़ी चिंताओं को दूर करते हुए गोपालन ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों में पाई जाने वाली अधिकांश विसंगतियां, जैसे नाम या आयु में त्रुटियां, छोटी-मोटी होती हैं और उन्हें केवल एक ही क्षेत्रीय जांच के माध्यम से हल किया जा सकता है।

सीईओ गोपालन ने कहा, "असल में, ज्यादातर लॉजिकल गलतियां छोटी होती हैं, जैसे उम्र में अंतर, नाम में अंतर। इन्हें फील्ड जांच में सिर्फ एक पंचनामे के जरिए ठीक किया जा सकता है। गंभीर गलतियों के लिए वोटर से सहायक सबूत देने के लिए कहा जा सकता है। अगर कोई सहायक सबूत नहीं भी है, तो भी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) फैसला ले सकते हैं। सबूत न होने का मतलब यह नहीं है कि वोटर अयोग्य है।"

जो मतदाता अभी अपने घरों से दूर हैं, उनके लिए सीईओ ने पुष्टि की कि परिवार के सदस्य उनकी तरफ से एन्यूमरेशन फॉर्म ले सकते हैं और उनके लिए उस पर दस्तखत कर सकते हैं।


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