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ओडिशा: बच्ची की हत्या के मामले में अदालत ने शख्स को सुनाई मौत की सजा

ओडिशा के अंगुल जिले की एक अदालत ने 40 साल के एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई है

ओडिशा: बच्ची की हत्या के मामले में अदालत ने शख्स को सुनाई मौत की सजा
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भुवनेश्वर। ओडिशा के अंगुल जिले की एक अदालत ने 40 साल के एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई है। उस पर निशा इंडस्ट्रियल पुलिस स्टेशन इलाके में 2025 में यौन हमले के बाद महज 4 साल 10 महीने की एक बच्ची की बेरहमी से हत्या करने आरोप था।

दोषी, बाबुल जेना (40), अंगुल जिले के जरपाड़ा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत जेरेंग गांव के देहुरी साही का रहने वाला है।

विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 103(1), 65(2), और 238(ए) और पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अपराधों का दोषी पाया।

अंगुल पुलिस ने शुक्रवार को एक प्रेस नोट में बताया, "13 मार्च 2025 को नाबालिग अपने घर के सामने खेलते हुए लापता हो गई। परिवार और पड़ोसियों द्वारा खोजबीन करने के बावजूद उसका पता नहीं चल सका। उसके पिता ने बाद में 14 मार्च 2025 को इंडस्ट्रियल पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। दुख की बात है कि बच्ची का शव 15 मार्च 2025 को उसके घर के पास एक महुआ के पेड़ के नीचे बरामद किया गया।"

शव बरामद होने के बाद बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम जांच में गर्दन दबने से मौत की पुष्टि हुई, और जांच के नतीजे जबरदस्ती किए गए यौन हमले के संकेत दे रहे थे।

स्थानीय लोगों को इस जघन्य अपराध में बाबुल के शामिल होने का शक था, क्योंकि वह उस समय वहीं मौजूद था जब पीड़िता बाहर खेल रही थी, और बाद में वह भी लगभग उसी समय लापता हो गया था जिस समय बच्ची लापता हुई थी।

आरोपी बाबुल जेना की पहचान की गई और घटना के महज चार दिन के भीतर 17 मार्च 2025 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे 18 मार्च 2025 को अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि दोषी ने नाबालिग बच्ची को अगवा करने के बाद उसे अपने घर ले जाकर उसके साथ रेप किया था। बाद में बबुला ने नाबालिग का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और उसके शव को गांव के पास फेंक दिया।

अदालत ने गवाहों के बयानों के साथ-साथ मेडिकल और वैज्ञानिक रिपोर्टों सहित सभी सबूतों की जांच करने के बाद आरोपी को इस अपराध का दोषी पाया और शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने अंगुल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के माता-पिता को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान, दिलीप कुमार दास अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक के रूप में पेश हुए।


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