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ओडिशा के मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की भूमिका की सराहना की, मजदूर दिवस पर वेतन वृद्धि की घोषणा

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि श्रमिकों की अथक मेहनत और बलिदान ओडिशा और देश को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं

ओडिशा के मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की भूमिका की सराहना की, मजदूर दिवस पर वेतन वृद्धि की घोषणा
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भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को कहा कि श्रमिकों की अथक मेहनत और बलिदान ओडिशा और देश को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए उचित वेतन और सम्मानजनक कार्य-वातावरण सुनिश्चित करना उनकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।

भुवनेश्वर में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "श्रमिक ही मानव सभ्यता के सच्चे निर्माता हैं। उनकी अथक मेहनत और बलिदान हमारे राष्ट्र और राज्य को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इसलिए, हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें उचित वेतन मिले, साथ ही उनके समान अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन श्रमिकों की एकता, संघर्ष और अधिकारों का प्रतीक है। सरकार ने श्रमिकों के समग्र कल्याण के लिए कई पहलें की हैं।

राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए सीएम माझी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के तहत 5 लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों का नया पंजीकरण किया गया है और उन्हें 541 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं।

संतुष्टि व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 'श्रमिक साथी' मोबाइल ऐप के माध्यम से श्रमिकों तक सभी आवश्यक सेवाएं सुचारू रूप से पहुंचाई जा रही हैं।

इस मौके पर सीएम माझी ने मजदूरों के लिए वेरिएबल महंगाई भत्ते में हर दिन 10 रुपए की बढ़ोतरी का ऐलान किया, जो 1 अप्रैल से पिछली तारीख से लागू होगी।

इसके परिणामस्वरूप, अकुशल मजदूरों की रोजाना की मजदूरी बढ़कर 472 रुपये, अर्ध-कुशल मजदूरों की 522 रुपये, कुशल मजदूरों की 572 रुपये और अत्यधिक कुशल मजदूरों की 622 रुपये हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सहायता पर विशेष जोर दे रही है, जिसके लिए एक हेल्पलाइन सिस्टम तुरंत सहायता उपलब्ध कराता है।

उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण के साथ, आने वाले दिनों में संकटग्रस्त पलायन (ददाना प्रणाली) की समस्या हल हो जाएगी और श्रमिकों को राज्य के भीतर ही रोजगार मिल जाएगा। इस दिशा में कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। रिवर्स माइग्रेशन (उल्टा पलायन) शुरू हो चुका है, जिसमें ओडिया श्रमिक तिरुपुर और कोयंबटूर जैसी जगहों से लौटकर राज्य के कपड़ा उद्योग में काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता संभालने के महज 22 महीनों के भीतर, लगभग 92 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। इनमें से लगभग 10 हजार युवा दूसरे राज्यों से लौटे हैं और अब ओडिशा में काम कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि श्रमिकों के लिए साल भर रोजगार सुनिश्चित करने के लिए, सरकार 'दलखाई योजना' शुरू कर रही है, जो संकटग्रस्त पलायन की समस्या को हल करने में अहम भूमिका निभाएगी।

शुक्रवार को पूरे राज्य में 6 हजार पात्र निर्माण श्रमिकों को पहचान पत्र जारी किए गए और इस अवसर पर लाभार्थियों को 150 करोड़ रुपए की सहायता राशि वितरित की गई।


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