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ओडिशा विधानसभा में गतिरोध जारी, अध्यक्ष ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के सदस्यों के मंडियों में हुई अराजकता और एपस्टीन फाइल्स के मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन के चलते सोमवार को भी ओडिशा विधानसभा में व्यवधान जारी रहा।

ओडिशा विधानसभा में गतिरोध जारी, अध्यक्ष ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
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भुवनेश्वर। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के सदस्यों के मंडियों में हुई अराजकता और एपस्टीन फाइल्स के मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन के चलते सोमवार को भी ओडिशा विधानसभा में व्यवधान जारी रहा।

सोमवार को सुबह 10:30 बजे प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही बीजू जनता दल (बीजद) के सदस्य विधानसभा के वेल में पहुंच गए। उनके पास पोस्टर थे। वह अध्यक्ष की कुर्सी के सामने पहुंचकर सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। नारेबाजी करते हुए उन्होंने राज्यभर की मंडियों में धान खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया, जो धान की खरीदी न होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान न होने जैसी समस्याओं के कारण गंभीर संकट में हैं। कांग्रेस के सदस्यों ने भी सदन में हंगामा मचाते हुए एपस्टीन फाइल्स पर चर्चा की मांग की।

सदन के अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से बार-बार अपील की कि वे अपनी सीटों पर लौटें और सदन को काम करने दें। हालांकि, सदस्यों ने किसी की नहीं सुनी और विरोध जारी रहा।

इस हंगामे के कारण ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष को सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा और अंततः कार्यवाही को शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए, वरिष्ठ बीजेडी नेता दिव्या शंकर मिश्रा ने ओडिशा सरकार की विधानसभा में गतिरोध के लिए कड़ी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि बीजेडी किसानों के मुद्दों पर अपनी आवाज तेज करेगी और मंगलवार को भुवनेश्वर में बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन करेगी। वर्तमान हालात देखकर मुझे शर्मिंदगी हो रही है। लोकतंत्र में शासन का उद्देश्य सबसे गरीब, किसान, पिछड़े वर्ग और वंचित समुदायों की भलाई होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, यह सरकार कल्याण के वास्तविक अर्थ को समझने में विफल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ती कृषि लागत के बावजूद सरकार ने किसानों को नजरअंदाज किया है। किसानों के लिए 100 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा नहीं किया गया और सरकार ने एमएसपी बढ़ाने की बात की, लेकिन किसानों को लाभ नहीं मिल रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बीज, उर्वरक और अन्य कृषि इनपुट की लागत में काफी वृद्धि हुई है, फिर भी किसानों को पर्याप्त सहायता नहीं दी जा रही।


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