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रावण दहन के विरोध में आदिवासी संगठन

आदिवासी संगठनों ने करीब दो महीने पहले रावण दहन के संबंध में प्रशासन को ज्ञापन देकर का विरोध दर्ज कराया था

रावण दहन के विरोध में आदिवासी संगठन
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अनूपपुर। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिले अनूपपुर के एक क्षेत्र में विभिन्न आदिवासी संगठनों के विरोध के चलते इस वर्ष रावण दहन नहीं हो सका।

कल एक बार फिर विरोध होने के चलते दशहरा उत्सव समिति ने किसी भी विवाद से बचने के लिए रावण दहन नहीं करने का फैसला किया।

राजेंद्रग्राम तहसीलदार पंकज नयन तिवारी ने दूरभाष पर बताया कि जयस समेत सात आदिवासी संगठनों ने 28 सितंबर को दिए ज्ञापन में रावण दहन नहीं करने की मांग की थी। इसी क्रम में कल विजयादशमी के अवसर पर विभिन्न संगठनों ने एक बार फिर विरोध किया।

आदिवासी संगठनों ने रावण दहन करने वाली समिति पर प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी दी, जिसके बाद दशहरा उत्सव समिति ने रावण दहन नहीं करने का फैसला कर लिया। तिवारी के मुताबिक आदिवासी संगठन रावण को अपना पूर्वज और आराध्य मान रहे हैं और इसलिए उसके दहन का विरोध कर रहे हैं।

झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई आदिवासी अंचलों में भी स्थानीय लोग रावण दहन नहीं करते हुए दशहरे के दिन महिषासुर की पूजा करते हैं। स्थानीय आदिवासियों का मानना है कि रावण और महिषासुर उनके पूर्वज थे। कई क्षेत्रों में इस दिन को महिषासुर शहादत दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है।


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