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आदिवासी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ

जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने समाज की मुख्यधारा से आदिवासियों को जोड़ने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि जनजातीय लोगों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

आदिवासी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ
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नई दिल्ली । जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने समाज की मुख्यधारा से आदिवासियों को जोड़ने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि जनजातीय लोगों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

श्री मुंडा ने यहां भारतीय व्यापार एवं उद्योग मंडल एसोचैम के एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय में एक बड़ी क्षमता है जो अभी भी विभिन्न कारणों की वजह से सामने नहीं आयी है। उन्होंने कहा “देश में आदिवासी विरासत के बारे में जागरूकता की कमी है और देश भर में आदिवासी उपज की उपयोगिता और विविधता के बारे में अज्ञानता है ।"

केंद्रीय मंत्री ने महात्मा गांधी की 151 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एसोचैम के अगले तीन साल के लिए जनजातीय मामलों के मंत्रालय, के सहयोग से तैयार ' आदिवासी उद्यमिता विकास उत्कृष्टता केंद्र’ का उद्घाटन किया।

श्री मुंडा ने कहा कि यह केंद्र आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए काम करेगा। यह आदिवासियों के स्थिति को बेहतर बनाने और उसका विकास करने में मददगार साबित होगा और आदिवासी कारीगरों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर पैदा करेगा।

विकास में सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए श्री मुंडा कहा, “मैं उद्योग जगत के सदस्यों सहित सभी पक्षधारकों का आह्वान करता हूं, कि वे आदिवासी समुदायों की क्षमता को विकसित करने और सामाजिक-आर्थिक विकास में उनके योगदान को बढ़ाने के लिए कार्यरत रहे, जिससे वे अपनी क्षमताओं का निर्माण करने में सक्षम हो और इस प्रकार माननीय प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के अभियान को पूरा किया जा सकेगा। "


इस अवसर पर एक वेबिनार 'खादी: स्वतंत्र, आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक' आयेजित किया गया।इसमें महात्मा गांधी की जयंती मनाने के साथ ही वंचित, उपेक्षित और कमज़ोर समुदायों के उत्थान, समावेश और सशक्तिकरण पर चर्चा की गयी।यह चर्चा देश में आदिवासी समुदायों की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की शीघ्रता और उसका सहयोग करने पर केंद्रित थी।


देश में जनजातीय आबादी एक विशाल विविधता का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें भाषा, भाषाई लक्षणों, विविध परिस्थितियां, शारीरिक विशेषताओं, आजीविका के तरीकों, विकास के स्तर आदि की वजह से बने अलग -अलग समूह शामिल हैं। यह व्यापक विविधता उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अवसरों और चुनौतियों पैदा करती है।
एसोचैम के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि सुदूर स्थानों को देखते हुए जहां ये आदिवासी आबादी रहती है, आवश्यक सेवाओं को पहुंचाना और सुनिश्चित करना कि वे आर्थिक विकास से लाभान्वित हो सकें, देश के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। डॉ़ हीरानंदानी ने कहा,“अनुसूचित जनजातियां अपने विकास के मामले में औसत भारतीय जनसंख्या से लगभग 20 वर्ष पीछे हैं। जनसंख्या के लगभग आठ प्रतिशत की इस आबादी को पूरी तरह से विकसित और लाभान्वित किया जाना चाहिए। यह 'ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम ’हमारे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में उनके योगदान का अनुकूलन करेगा और भारत के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों का सहयोग करेगा।”


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