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ललित सुरजन की कलम से देशबन्धु के साठ साल-5
'मेरे दादाजी की उम्र के बापा एक दिलचस्प व्यक्ति थे। उन्होंने व उनके सुपुत्र कांतिभाई ने गाढ़े वक्तों में कई बार हमें सहायता दी और कभी खाली हाथ नहीं...

