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ललित सुरजन की कलम से — बौने टिड्डी बनकर छा गए
'यह हमारे समय की विडम्बना है कि एक तरफ यह नजारा है तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में ऐसे लोग जो बुध्दि विवेक में बौने हैं, आए दिन किसी न किसी रूप में...

