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कोलेजियम की सिफारिश पर अभी तक अमल न होने पर सर्वोच्च न्यायालय ने जताई नाराजगी!

सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों को लेकर कोलेजियम द्वारा सुझाए गए नामों की सिफारिश पर केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैए पर नाराजगी जताई है

कोलेजियम की सिफारिश पर अभी तक अमल न होने पर सर्वोच्च न्यायालय ने जताई नाराजगी!
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- विंध्यवासिनी त्रिपाठी

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों को लेकर कोलेजियम द्वारा सुझाए गए नामों की सिफारिश पर केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैए पर नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने लॉ सचिव को नोटिस देकर पूछा है कि जजों की नियुक्तियों में देरी की वजह क्या है। लंबे समय तक नियुक्तियों को रोके रखना उसे स्वीकार्य नहीं है।

बतादें कि कोलेजियम ने उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्तियों को लेकर काफी समय से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज रखा है। लेकिन उस पर अभी तक अमल नहीं किया जा सका है।

कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरू द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और एएस ओका की बेंच ने अपने आदेश में कहाकि कोलेजियम द्वारा भेजे गए नामों को इस तरह रोककर रखना स्वीकार्य नहीं है। यह एक तरह से इन व्यक्तियों को अपना नाम वापस लेने के लिए मजबूर करने जैसा उपकरण बनता जा रहा है। जो कि हुआ भी है।

न्यायमूर्ति कौल ने कहाकि कोलेजियम ने 11 नामों का प्रस्ताव दिया था,जिन्हें केंद्र की मंजूरी मिलनी थी। लेकिन प्रस्ताव अभी भी लंबित है।शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से पेश अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से कहाकि न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता के नाम का प्रस्ताव दिए 5 सप्ताह हो गए। इसे कुछ दिनों में ही मंजूरी मिल जानी चाहिए थी।

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति कौल ने कहाकि ऐसा क्यों हो रहा है,यह उनकी समझ से बाहर है। बेंच ने कहाकि नियुक्तियों में देरी के चलते ही सर्वोच्च न्यायालय ने 2021 में एक आदेश पारित कर समयरेखा दी थी।

जिसमें प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहाकि इस मामले 6 महीने पहले नाम भेजने की समय अवधि इस कल्पना के साथ की गई थी,इतना समय प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त होगा।


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