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फर्जी ओडीएफ होने की पोल परत दर परत खुलने लगी

बालोद ! बालोद जिले को फर्जी ढंग से ओडीएफ होने की घोषणा की पोल परत दर परत खुलने लगी है। जहां सिर्फ कागजो व सरकारी आंकड़ो में ही बालोद जिला ओडीएफ होने की रिकार्ड बता रहा है

फर्जी ओडीएफ  होने की पोल परत दर परत खुलने लगी
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बालोद ! बालोद जिले को फर्जी ढंग से ओडीएफ होने की घोषणा की पोल परत दर परत खुलने लगी है। जहां सिर्फ कागजो व सरकारी आंकड़ो में ही बालोद जिला ओडीएफ होने की रिकार्ड बता रहा है जो कुल मिलाकर पूर्ण रूप से फर्जी साबित होने लगी है। आज भी ग्रामीण अंचलो के ग्रामीणो के घरो में पूर्ण रूप से शौचालय का निर्माण नही हो पाया है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण बालोद जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम झलमला इसका प्रत्यक्ष सबूत है। वहीं इस ग्राम में गरीबी रेखा के अंतर्गत जीवन यापन करने वाले निवासरत् परिवार आज भी शासकीय योजनाओं से कोसो दूर हैं। जहां इनके घरो में आज भी स्चच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जाने वाले शौचायल निर्माण का नामो निशान नही है। जिसमें 40 वर्षीय डेमिन बाई साहू पति किशुन लाल साहू के घर में आज भी शौचालय का निर्माण नही हो पाया है। इसी तरह इसी ग्राम के अमृत बाई पति नारायण साहू 50 वर्ष तथा गन्नू राम पिता सोनू राम ठाकुर 65 वर्ष, के घर शौचालय का निर्माण नही हो पाया है, गन्नू राम ठाकुर ने देशबंधु प्रतिनिधि को बताया कि मुझे आज तक शासन के किसी भी योजना का लाभ नही मिल पाया है, मुझे न ही वर्तमान में किसी प्रकार की कोई पेंशन मिल पा रही है ना ही उज्जवला योजना के तहत गैस चूल्हा या सिलेण्डर मिल पाया है और न ही मुख्यमंत्री खाद्यान्य प्रदाय योजना के तहत राशन मिल पा रहा है। उन्होने कहा कि अपनी पीड़ा बालोद विकासखंड अधिकारी व जिलाधीश को बता चुका हूं, बावजूद सरकारी अधिकारियों की मंशा क्या है मुझ जैसे गरीब वृद्ध को अब तक समझ नही आया। विदित है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की ताल ठोकने वाले जिला स्तर पर बैठे अधिकारियों को जिले से महज चार पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायतो की वस्तु स्थिति का जायजा लेने तक की फुरसत नही है और कागजो में सिर्फ श्रेय लेने का सिलसिला चलाया हुआ है। ग्राम झलमला के ग्रामीण जिनके घरों में आज भी शौचालय नही है उन्होने संपर्क करने के दौरान बताया कि घर में शौचालय का निर्माण नही होने के करण आज भी वे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि जनपद पंचायत बालोद विकासखंड के 57 ग्राम पंचायतो को कागजो पर ओडीएफ करने की तैयारी में है। जबकि हकीकत तो यह है कि आज भी विकासखंड के अनेक ग्रामों में लोग खुले में शौच कर रहे हैं, जिसका प्रमुख वजह पूर्ण रूप से शौचालय का निर्माण नही हो पाना। विकासखंड के अनेक ग्राम पंचायतो में बनाये जाने वाले स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालय आज भी आधे अधूरे हैं। जहां कहीं शौचालय में दरवाजा नही लगा है तो कहीं शौचालय में सीट ही नही लगी है और कही शौचालय का छत ही खुला है। और तो और कही कहीं सिर्फ शौचालय की टंकी बनाकर ही छोड़ दिया गया है। और बालोद जनपद पंचायत के अधिकारी द्वारा विकासखंड को पूर्ण रूप से ओडीएफ करने की ताल ठोकी जा रही है। यदि वास्तव में यह अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाया जाना है तो सारी औपचारिक्ताएं पूर्ण करते हुए शौचालय निर्माण को पूरा किया जाए, तभी बालोद विकासखंड ओडीएफ की श्रेणी में आ पाएगा अन्यथा दिया तले अंधेरा वाली बात साबित होगी।
लेख है कि तानाशाही फरमान से पीडि़त होकर सरपंच सचिव स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के कार्यो में रूचि नही दिखाई गई साथ ही साथ निर्माण कार्यो की राशि की भुगतान नही किया जाना ठेकेदारी को बढ़ावा देना अनेक वजह है। गौरतलब है कि शासन द्वारा सुघ्घर पंचायत सुघ्घर विकासखंड एवं सुघ्घर जिला के तहत पुरूस्कार देने की घोषणा पूर्व में की गई है। शासन की मंशा है कि गावं में शौचालय निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है अब उसे आदर्श ग्राम बनाया जाना है। परंतु आज वर्तमान में यह अभियान ढोल के अंदर पोल वाली बात चरितार्थ हो रही है। वहीं इस अभियान को सफल बनाने के लिए छ.ग. शासन द्वारा ओडीएफ हुए ग्राम पंचायतो का अधिकारियों द्वारा निरीक्षण करवाये जाने के बाद जिले के तीन ग्राम पंचायतो को 20-20 लाख रूपये एवं स्वच्छ ब्लाक को 50 लाख रूपये एवं स्वच्छ जिले को एक करोड़ रूपये की प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा।
जिसके लिए स्थानीय स्तर पर पंचायत सचिव व सरपंचगण प्रयासरत हैं। परंतु ग्रामीण पंचायत विकास विभाग के विभागीय अधिकारियों के नकारात्मक रवैये के चलते यह सब वर्तमान में धरा का धरा रह गया है। जिले के अधिकारियों को सिर्फ एक दूसरे को आदेश निर्देश करते देखा जा सकता है। परंतु जमीनी स्तर पर हकीकत में वह कार्य परिणीत हो ऐसा जिले के अधिकारियों की मंशा नही रही है। तभी तो आज बालोद जिले ओडीएफ के क्षेत्र में कॉफी पीछे चलने लगी है। और यह ओडीएफ सिर्फ कागजो पर करने की तैयारी है। और बालोद जिला ओडीएफ हो गया है यह कहते हुए हो हल्ला मचाया जा रहा है। जबकि वस्तु स्थिति तो ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर देखा जा सकता है। जो ढोल के अंदर पोल दिखाई दे रही है।


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