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नोएडा ट्विन टावर को तोड़ने की तारीख करीब, दहशत में आसपास के लोग

नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर को तोड़ने की तिथि 28 अगस्त रखी गई है। महज 9 सेकेंड के अंदर ट्विन टावर धराशाई हो जाएगा

नोएडा ट्विन टावर को तोड़ने की तारीख करीब, दहशत में आसपास के लोग
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नोएडा, नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर को तोड़ने की तिथि 28 अगस्त रखी गई है। महज 9 सेकेंड के अंदर ट्विन टावर धराशाई हो जाएगा। लेकिन सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट में रहने वाले लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इस सोसाइटी में रहने वाले लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं। लोग अपने परिवार के साथ खुद को यहां पर सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे हैं। सुपरटेक एमेरल्ड कोर्ट में रहने वाले प्रताप चक्रवर्ती का फ्लैट ट्विन टावर से 9 मीटर की दूरी पर भी नहीं है। उन्होंने अपनी जिंदगी की गाढ़ी कमाई लगाकर 90 लाख में 2018 में यह प्रॉपर्टी खरीदी थी। तब से उनके परिवार का सुखचैन खो चुका है। प्रताप चक्रवर्ती का कहना है की डिमोलिशन के चलते उनका कितना नुकसान होगा यह कह पाना मुश्किल है। वह और उनका परिवार डर के साए में जीने को मजबूर हैं।

प्रताप चक्रवर्ती की तरह ही इस सोसाइटी में रहने वाले कई लोग डिमोलिशन को लेकर डरे हुए हैं, खुद आरडब्लूए भी पूरी तरह से डिमोलिशन प्रोसेस को लेकर संतुष्ट नहीं दिखाई देता।

अमरोल कोटा डब्ल्यू के अध्यक्ष यू बी एस तेवतिया के मुताबिक उन्हें डिमोलिशन प्रक्रिया से डर तो नहीं लग रहा है, लेकिन सब कुछ ठीक हो जाए। उन्होंने बताया कि इतनी मानसिक पीड़ा उनको कभी नहीं हुई जो इस दौरान हो रही है, साथ ही साथ यह सिर्फ डिमोलिशन हो यही उम्मीद की जा रही है।

गौर करने वाली बात यह है की सोसाइटी में सुपरटेक ने पहले 40 पिलर की मरम्मत शुरू की थी। आपत्ति करने के बाद केवल 10 और पैरों की मरम्मत करने का वादा किया गया, लेकिन सोसाइटी में कम से कम 300 किलो रो और कॉलम की मरम्मत होनी चाहिए बिल्डर ने खुद स्ट्रक्च रल ऑडिट नहीं कराया और अब उनकी खुद की ऑडिट के आधार पर चिन्हित किए गए 50 पिलारों की मरम्मत का काम चल रहा है। यह वह पिलर रहे हैं जिनको सबसे ज्यादा मरम्मत की जरूरत है।

धूल आदि से बचने के लिए ट्विन टावर के आसपास के टावरों को जिओ फाइबर टैक्सटाइल से ढक दिया गया है, इसका असर महिलाओं बुजुर्गों मरीजों आदि पर पड़ रहा है। उस साइड के फ्लैटों में ऐसी तक नहीं चलाया जा सकता। इससे उनको काफी परेशानी हो रही है, आलम ये है कि लोग खिड़की तक खोल नहीं सकते हैं।


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