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सरकार की नीतियों के कारण संकट से घिर गया है देश: सोनिया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कुप्रबंधन और गलत नीतियों के कारण देश आज कई तरह के संकट से घिर गया है

सरकार की नीतियों के कारण संकट से घिर गया है देश: सोनिया
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नयी दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कुप्रबंधन और गलत नीतियों के कारण देश आज कई तरह के संकट से घिर गया है और चारों तरफ पीड़ा एवं भय का माहौल है और राष्ट्र की सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

श्रीमती गांधी ने मंगलवार को यहां पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्य समिति की वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि देश आज जिन परिस्थितियों से जूझ रहा है, उन्हें सुखद नहीं कहा जा सकता है। उन्हें एक कहावत ‘दुखद घटनाएं कभी अकेले नहीं आती’ को उद्धृत करते हुए कहा कि देश भयावह आर्थिक संकट,भयंकर महामारी और अब चीन के साथ सीमा पर एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार की गलत नीतियां और कुप्रबंधन के कारण देश में आज व्यापक पीड़ा तथा भय का माहौल है और हमारी सुरक्षा तथा भूभागीय अखंडता पर खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक संकट पहले की तुलना में और गहरा गया है। मोदी सरकार किसी भी सलाह को सुनने को तैयार नहीं है। देश में जो स्थिति पैदा हुई है, उसे देखते हुए इस समय बड़े पैमाने पर सरकारी खजाने से मदद, गरीबों के हाथों में सीधे पैसा पहुंचाने, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों की रक्षा और उनका पोषण करने, मांग को बढ़ाने तथा प्रोत्साहित करने की जरूरत है। सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए गंभीर प्रयास करने की बजाय खोखले वित्तीय पैकेज की घोषणा की जो सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत से कम है।

कांग्रेस नेता ने तेल की कीमतों में बढोतरी को लेकर भी सरकार की आलाेचना की और कहा कि वैश्विक बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हों तो सरकार लगातार 17 दिनों तक निर्दयतापूर्वक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि कर देश की जनता को गहरा दर्द दे रही है। नतीजा यह है कि भारत की गिरती अर्थव्यवस्था 42 वर्षों में पहली बार तेजी से मंदी की ओर फिसल रही है।

श्रीमती गांधी ने कहा कि कोरोना महामारी से निपटने में यह सरकार असफल रही है। उनका कहना था कि जब पहली बार लॉकडाउन हुआ, तब ही स्पष्ट हो गया था कि सरकार लॉकडाउन से होने वाली समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए बिलकुल तैयार नहीं थी। इसी का परिणाम रहा कि विभाजन के बाद देश को सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी का सामना करना पड़ा। करोड़ों प्रवासी मजदूर, दैनिक वेतन भोगी और स्व-नियोजित कामगारों की रोजी रोटी छिन गई तथा 13 करोड़ नौकरियां ख़त्म हो गयी। करोड़ों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम-एमएसएमई बंद हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन एक के दौरान श्री मोदी को लगा कि कोरोना पर आसानी से जीत हासिल कर लेंगे इसलिए उन्होंने सारी शक्तियों को अपने हाथों में केंद्रीकृत कर लिया था लेकिन उनके आश्वासनों के विपरीत महामारी लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। महामारी शायद अभी भी सबसे ऊंचे पायदान पर नहीं पहुंची है लेकिन अब केंद्र ने अपनी सारी जिम्मेदारियां राज्य सरकारों पर डाल दी है लेकिन उन्हें कोई अतिरिक्त वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है। एक तरह से लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

चीन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा “चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अब हमारे सामने बड़े संकट की स्थिति है। इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि अप्रैल-मई से लेकर अब तक चीनी सेना ने पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र और गलवान घाटी तथा लद्दाख में हमारी सीमा में घुसपैठ की है। अपने चरित्र के अनुरूप सरकार इस सच्चाई से मुंह मोड़ रही है। घुसपैठ की ख़बरें पांच मई को आई लेकिन इसका समाधान निकलने की बजाय स्थिति तेजी से बिगड़ती गई और 15-16 जून को हिंसक झड़पें हुईं जिसमें हमारे 20 जवान शहीद हो गये। इस झड़प में हमारे 85 जवान घायल हुए और दस को चीन ने पकड़ लिया था जिन्हें अब छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण पर श्री मोदी के ‘किसी ने भी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ नहीं की’ वाले बयान ने पूरे देश को झकझोर दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा और भूभागीय अखंडता के मामलों पर पूरा राष्ट्र हमेशा एक साथ खड़ा है और इस बार भी किसी दूसरी राय का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि अमन, शांति और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पहले जैसी यथास्थिति की बहाली हमारे राष्ट्रीय हित में एक मात्र मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए। हम स्थिति पर लगातार नजर बनाये रखेंगे।”


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