सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा दक्षता सुधार मिशन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कमान में एक मानव संसाधन परिषद का गठन होगा जो शीर्ष निकाय के तौर पर सिविल सेवा-सुधार कार्य और क्षमता विकास को कार्यनीतिक दिशा प्रदान करेगी।

नयी दिल्ली । सरकार ने देश के दो करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यक्षमता एवं दक्षता बढ़ाने के लिए उद्देश्य से ‘राष्ट्र के लिए कर्मयोगी’ मिशन की आज घोषणा की जिसके तहत प्रशिक्षण की संरचना में व्यापक बदलाव किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कमान में एक मानव संसाधन परिषद का गठन होगा जो शीर्ष निकाय के तौर पर सिविल सेवा-सुधार कार्य और क्षमता विकास को कार्यनीतिक दिशा प्रदान करेगी।
यह निर्णय आज यहां प्रधानमंत्री श्री मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। बैठक के बाद केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर और डॉ. जितेन्द्र सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना के बाद सरकार ने मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में सबसे बड़े सुधार को क्रियान्वित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ‘मिशन कर्मयोगी’ के नाम से राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) शुरू किया जा रहा है।
मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य भारतीय सिविल सेवक को और अधिक रचनात्मक, सृजनात्मक, विचारशील, नवाचारी, अधिक क्रियाशील, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी समर्थ बनाते हुए भविष्य के लिए तैयार करना है। विशिष्ट भूमिका क्षमताओं के साथ सिविल सेवक उच्च गुणवत्ता वाली मानक प्रभावी सेवा प्रदान करने में समर्थ होंगे।
इस मिशन के तहत विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए क्षमता विकास की एक नयी राष्ट्रीय अवसंरचना तैयार की गयी है जिसमें दक्षतापूर्ण सार्वजनिक सेवा प्रदान करने के लिए व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया स्तरों पर क्षमता विकास व्यवस्था में व्यापक सुधार लाने का लक्ष्य है। इस मिशन में कार्यसंस्कृति के रूपांतरण, सार्वजनिक संस्थानों के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रयाेग को सुव्यवस्थित रूप से जोड़कर सिविल सेवा क्षमताओं में आमूलचूल बदलाव किए जाने का प्रस्ताव है।
सिविल सेवा क्षमता विकास योजनाओं के अनुमोदन और निगरानी करने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रख्यात सार्वजनिक मानव संसाधन पेशेवरों, विचारकों, वैश्विक विचारकों और लोक सेवा प्रतिनिधियों वाली एक सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद का गठन किया जाएगा जबकि क्षमता विकास आयोग द्वारा प्रशिक्षण मानकों में सामंजस्य बनाने, साझा संकाय और संसाधन तैयार करने तथा सभी केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों पर पर्यवेक्षी भूमिका निभाने का काम किया जाएगा।
ऑनलाइन आईगॉट –कर्मयोगी प्लेटफार्म दो करोड़ से ज्यादा कार्मिकों के लिए क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक संरचना का निर्माण करेगा।
‘सही भूमिका’ के लिए ‘सही व्यक्ति’ को कार्य सौंपने को लक्षित दक्षता आधारित मानव विकास (एचआर) प्रबंधन नीति के माध्यम से नागरिक केन्द्रित व्यवस्था को आगे बढ़ाने के मकसद से मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम ('एनपीसीएससीबी') को शुरू करने हेतु अनुमोदन प्रदान किया है जिसमें मुख्यत: प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद, क्षमता विकास आयोग, डिजिटल परिसम्पत्तियों के स्वामित्व तथा प्रचालन और ऑनलाइन प्रशिक्षण हेतु प्रोद्योगिकीय प्लेटफार्म हेतु विशेष प्रयोजन उपक्रम तथा मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में समन्वयन इकाई, ये चार भाग हैं।
एनपीसीएससीबी को सिविल सेवकों के लिए क्षमता विकास के लिए आधारशिला रखने हेतु बनाया गया है ताकि वे भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं से सराबोर रहें और विश्व भर की श्रेष्ठ पद्धतियों से सीखते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहें। इस कार्यक्रम को एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण-आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म की स्थापना करके कार्यान्वित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांतों में ‘नियम आधारित’ मानव संसाधन प्रबंधन से ‘भूमिका आधारित’ प्रबंधन के परिवर्तन को सहयोग प्रदान करना, उनके पद की आवश्यकताओं के अनुसार सिविल सेवकों को आवंटित कार्य को उनकी क्षमताओं के साथ जोड़ना, ‘ऑफ साइट सीखने की पद्धति’ को बेहतर बनाते हुए ‘ऑन साइट सीखने की पद्धति’ पर बल देना, शिक्षण सामग्री, संस्थानों तथा कार्मिकों सहित साझा प्रशिक्षण अवसंरचना परितंत्र का निर्माण करना, सिविल सेवा से संबंधित सभी पदों को भूमिकाओं, गतिविधियों तथा दक्षता के ढांचे (एफआरएसी) संबंधी दृष्टिकोण में अद्यतन करना और प्रत्येक सरकारी निकाय में चिह्नित एफआरएसी के लिए संगत अधिगम विषय-वस्तु का सृजन करना और प्रदान करना, सभी सिविल सेवकों को अपने-अपने आत्म-प्रेरित एवं अधिदेशित सीखने की प्रक्रिया पद्धति में अपनी व्यवहारात्मक, कार्यात्मक और कार्यक्षेत्र से संबंधित दक्षताओं को निरंतर विकसित एवं सुदृढ़ करने का अवसर उपलब्ध कराना है।
इसके तहत प्रत्येक कर्मचारी के लिए वार्षिक वित्तीय अंशदान के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया के साझा एवं एक समान परिवेश तंत्र के सृजन और साझाकरण के लिए अपने-अपने संसाधनों को सीधे तौर पर निवेश करने हेतु सभी केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों तथा उनके संगठनों को समर्थ बनाना, सार्वजनिक प्रशिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्ट-अप और एकल विशेषज्ञों सहित सीखने की प्रक्रिया संबंधी सर्वोत्तम विषय-वस्तु के निर्माताओं को प्रोत्साहित करना और साझेदारी करना तथा क्षमता विकास, विषय-वस्तु निर्माण, प्रयोक्ता फीडबैक और दक्षताओं की मैपिंग एवं नीति सुधारों के लिए क्षेत्रों की पहचान संबंधी विभिन्न पक्षों के संबंध में आईगॉट-कर्मयोगी द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों पर आंकड़ा विश्लेषण के कार्य करना शामिल है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में चयनित केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रख्यात सार्वजनिक मानव संसाधन पेशेवरों, विचारकों, वैश्विक विचारकों और लोक सेवा प्रतिनिधियों वाली एक सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद शीर्ष निकाय के तौर पर कार्य करेगी जो सिविल सेवा-सुधार कार्य और क्षमता विकास को कार्यनीतिक दिशा प्रदान करेगी।
लगभग 46 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों को कवर करने के लिए वर्ष 2020-2021 से लेकर 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि के दौरान 510.86 करोड़ रु की राशि का व्यय किया जाएगा। इस व्यय को पांच करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि की बहुपक्षीय सहायता द्वारा आंशिक रूप से वित्तपोषित गया है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अधीन एनपीसीएससीबी के लिए पूर्णत स्वामित्व वाले विशेष प्रयोजन उपक्रम (एसपीवी) की स्थापना की जाएगी। एसपीवी एक ‘गैर-लाभ अर्जक’ कंपनी होगी जो आईगॉट- कर्मयोगी का स्वामित्व और प्रबंधन करेगी। एसपीवी विषय-वस्तु बाजार का निर्माण और संचालन करेगी और यह विषय-वस्तु वैधीकरण, स्वतंत्र निरीक्षण आंकलन एवं टेलीमेट्री डेटा उपलब्धता से संबंधित आईगॉट- कर्मयोगी प्लेटफॉर्म की प्रमुख व्यवसायिक सेवाओं का प्रबंधन करेगी। यह एसपीवी भारत सरकार की ओर से सभी बौद्धिक संपदा अधिकारों का स्वामित्व रखेगी। प्रमुख कार्य-निष्पादन संकेतकों का डैशबोर्ड अवलोकन सृजित करने के लिए आईगॉट – कर्मयोगी प्लेटफ़ार्म के सभी प्रयोक्ताओं के कार्य-निष्पादन मूल्यांकन हेतु एक समुचित निगरानी और मूल्यांकन संरचना बनाई जाएगी।
इस मिशन में स्थापित होने वाले एक क्षमता विकास आयोग की का उद्देश्य सहयोगात्मक और सह-साझा आधार पर क्षमता विकास पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन और विनियमन में समान दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है। उसकी भूमिका वार्षिक क्षमता विकास योजनाओं का अनुमोदन करने के लिए प्रधानमंत्री सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद की सहायता करना, सिविल सेवा क्षमता विकास में लगे हुए सभी केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों पर कार्य का पर्यवेक्षण रखना, आंतरिक और बाह्य संकाय और संसाधन केंद्रों सहित साझा अधिगम संसाधनों का निर्माण करना, हितधारक विभागों के साथ क्षमता विकास योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु समन्वय और पर्यवेक्षण करना, प्रशिक्षण और क्षमता विकास, शिक्षाशास्त्र और पद्धति के मानकीकरण पर सिफारिशें करना, सभी सिविल सेवाओं के लिए सामान्य मध्य-कैरिअर प्रशिक्षण कार्यक्रमों हेतु मानदंड निर्धारित करना तथा सरकार को मानव संसाधन प्रबंधन तथा क्षमता विकास के क्षेत्रों में अपेक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों का सुझाव देना होगी।
आईगॉट –कर्मयोगी प्लेटफार्म प्लेटफार्म से विषय-वस्तु हेतु एक आकर्षक और विश्व स्तर के बाजार का विकास करने की संभावना है जहां सावधानी से तैयार और पुनरीक्षित डिजिटल ई–लर्निंग सामाग्री उपलब्ध करवाई जाएगी। क्षमता निर्माण के अतिरिक्त, सेवा मामलों जैसे कि परिवीक्षा अवधि के बाद स्थायीकरण, तैनाती, सौंपे गए कार्य और रिक्तियों की अधिसूचना आदि को अंत में प्रस्तावित क्षमता संरचना के साथ एकीकृत कर दिया जाएगा।


