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अंचल में आवारा कुत्तों का आतंक, प्रशासन गंभीर नहीं

 नगर सहित आसपास के अंचल में बीते 1-2 वर्ष से आवारा कुत्तों के आतंक से क्षेत्रवासी परेशान है

अंचल में आवारा कुत्तों का आतंक, प्रशासन गंभीर नहीं
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रतनपुर। नगर सहित आसपास के अंचल में बीते 1-2 वर्ष से आवारा कुत्तों के आतंक से क्षेत्रवासी परेशान है। झुंड बना कर ये कुत्ते अब लोगों को निशाना बना रहे है इन आवारा कुत्तो के काटने से सामुदायिक स्वास्थय केंद्र में रोजाना 1-2 लोग अपना इलाज कराने आते है वही धर्म नगरी रतनपुर में नपा द्वारा इन आवारा कुत्तो से निपटने कोई पहल नही किया जा रहा है।

धार्मिक नगरी रतनपुर एवं आसपास अंचलों में विगत लगभग 1 वर्ष से यहां के लोग कुत्ते के आतंक से परेशान है पशु कू्ररता अधिनियम के तहत इनहे मारने पर प्रतिबंध लगने के बाद रोजाना इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है कही भी चौक चौराहा गली मोहल्लो में इन आवारा कुत्तो की झुंड को देखा जा सकता है। ये आवारा कुत्ते लोगो को गंभीर रूप से जख्मी होने तक काट रहे है एैसे में रोजाना सामुदायिक स्वास्थय केंद्र रतनपुर में हर महिने करीब 45 से 60 लोग कुत्ते का शिकार होकर अपना ईलाज करवाने आते हंै। अंचल में इन आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर रोक लगाने अब तक ना ही राज्य शासन गंभीर नजर आ रही है और ना ही जिला प्रशासन जिसके चलते अंचल में निवास करने वाले लोग इन आवारा कुत्तों के भय से काफी भयभीत हैं

कोई पहल नही

शहर में आवारा कुत्तों की संख्या दिनों दिन गंभीर होती जा रही है कुत्तो के काटने के बाद एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिये अस्पताल में पहुंचने वालो की संख्या से अंदाजा लगाया जा सकता है की आखिर हालात क्या है अकेले शहर के शासकीय सामुदायिक स्वास्थय केंद्र में विगत 1 साल में कुत्ते के काटने से ईलाज के लिये करीब 500 लोगो की संख्या तक पहुंच गई है इसके बावजूद आवारा कुत्ते पर नियंत्रण के लिये जिम्मेदार नपा इस गंभीर समस्या को दूर नही कर रही है ना ही इन आवारा कुत्तो की नशबंदी कराई जा रही है ।

अकेले निकलने से लगता है डर

सबेरे जब मार्निंग वाक में पैदल निकलते है तब ये आवारा कुत्तो के द्वारा झुंड में काटने के लिये दौड़ाया जाता है वही आज कल इनहे भगाने के लिये डंडे लेकर मार्निंग वाक में जाना पड़ता है। नपा प्रशासन को इन आवारा कुत्तो की बड़ती हुई संख्या पर गंभीर होना चाहिये जिससे आम जन इन आवारा कुत्तो से सुरक्षित रहे।

बच्चे सुरक्षित नहीं

शहर में इन आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर छाया है की आये दिन इन आवारा कुत्तों के द्वारा गलियों में खेलते हुये बच्चो को अत्यधिक संख्या में निशाना बनाया जा रहा है जिससे अब बच्चों को घर से बाहर निकलने के लिये मना करना पड़ रहा है। नपा प्रशासन को चाहिये की जल्द इन आवारो कुत्तों पर लगाम कसते हुये कोई उचित पहल करे ताकी बच्चे सुरक्षित रहे।

रोजाना 2 से 3 मरीज पहुंच रहे

इस अस्पताल में आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज का इंजेक्शन लगवाने रोजाना दो से तीन लोग पहुंच रहे है विगत कुछ वर्षो में कुत्ते के काटने से मरीजो की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।कोई

योजना नहीं

बिलासपुर में एक एनजीओ के द्वारा आवारा कुत्तों की संख्या पर लगाम लगाने कुत्तों का नसबंदी किया जा रहा था, लेकिन रतनपुर परिक्षेत्र में इस तरह की कोई योजना संचालित नही है।


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