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बंगाल में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के कारण तनाव

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ पश्चिम बंगाल में सड़कें अवरुद्ध करने और रेलवे स्टेशनों पर तोड़फोड़ करने के अगले दिन आज तनाव बढ़ गया

बंगाल में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के कारण तनाव
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कोलकाता। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ पश्चिम बंगाल में सड़कें अवरुद्ध करने और रेलवे स्टेशनों पर तोड़फोड़ करने के अगले दिन आज तनाव बढ़ गया है, जिससे सड़कों पर यातायात और रेल परिवहन बाधित हो गया है। सीएए और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ ने शुक्रवार को मुर्शिदाबाद जिले में पूर्वी रेलवे के बेलदांगा रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ कर दी, जिसके बाद रेल कर्मियों को वहां से भागना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन मास्टर के केबिन में आग लगा दी और टिकट काउंटर में तोड़फोड़ करने के बाद उसमें आग लगा दी।

वे रेलवे ट्रैक पर भी बैठ गए, जिससे लालगोला और कृष्णानगर के बीच रेल यातायात बाधित हो गया।

एक अन्य मामले में भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने बेलदांगा में राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित कर टायरों में आग लगा दी और एंबुलेंस समेत अन्य वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

जिले में जलंगी, रघुनाथगंज, शमशेरगंज, कांडी, बहरामपुर और डोमकल में सड़क परिवहन बाधित रहा।

हावड़ा जिले में आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण-पूर्वी रेलवे के उलुबेरिया स्टेशन में घुसकर परिसर में तोड़फोड़ की।

इससे पहले भीड़ ने ट्रैक बाधित कर दिया, जिससे हावड़ा-खड़गपुर खंड पर अप-डाउन पर रेल परिवहन बाधित हो गया।

हावड़ा-कोरोमंडल एक्सप्रेस और हावड़ा-दिघा कंडारी एक्सप्रेस पर हमला कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने लोगों से नियम और संसद द्वारा पारित कानून में विश्वास करने शांति कायम करने की अपील की और हिंसा को दुर्भाग्यशाली बताया।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीएए के विरोध में बयान देकर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि 'बंगाल में शर्मनाक घटनाएं घुसपैठियों ने अंजाम दी' हैं।

सीएबी को संसद के दोनों सदनों में पारित करने के बाद कानून बना दिया गया, जिससे 31 दिसंबर 2014 से पहले से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में आकर शरणार्थी के तौर पर रह रहे हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों, जैनों और बौद्धों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी।


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