सुप्रीम कोर्ट का फैसला राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी को करारा थप्पड़: केटीआर
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के लिए "करारा थप्पड़" बताया।

हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने गुरुवार को तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के लिए "करारा थप्पड़" बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किए गए पूर्व खैरताबाद विधायक दानम नागेंदर की याचिका खारिज कर दी। नागेंदर ने अपनी अयोग्यता को चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
केटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दानम नागेंदर की अयोग्यता से बचने की कोशिश नाकाम हो गई है और सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई आधार नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी को लगता था कि वे दल-बदल के जरिए जनता के जनादेश को "चुरा" सकते हैं और विधानसभा अध्यक्ष की आड़ में इसे बचा सकते हैं। केटीआर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्पीकर कार्यालय के जरिए दल-बदल को संरक्षण देने की कोशिशों को बेनकाब करता है।
खैरताबाद में संभावित उपचुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की जनता जल्द ही "तीन साल के विश्वासघात, टूटे वादों और कुशासन" पर अपना फैसला सुनाएगी।
केटीआर ने व्यापक राजनीतिक संकेत देते हुए कहा, "एक विकेट गिर चुका है, जल्द ही और भी गिरेंगे।" राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने अपनी पोस्ट में उन्हें "एमएलए चोर" भी कहा।
विधानसभा में बीआरएस के उपनेता टी. हरीश राव ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह "संविधान बचाओ" की बात करने वाली कांग्रेस के दोहरे रवैये पर करारा प्रहार है।
हरीश राव ने कहा कि राहुल गांधी लगातार "संविधान बचाओ" की बात करते हैं, लेकिन अब उनके सामने संविधान में आस्था साबित करने की वास्तविक परीक्षा है। उन्होंने मांग की कि यदि राहुल गांधी सचमुच संविधान में विश्वास रखते हैं, तो कांग्रेस में शामिल हुए सभी दलबदलू विधायकों से तत्काल इस्तीफा दिलाकर उन्हें दोबारा जनता के बीच जनादेश लेने भेजना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में संवैधानिक नैतिकता की बात करना और तेलंगाना में अपनी ही पार्टी के आचरण पर चुप रहना दोहरा मापदंड है। हरीश राव ने सवाल उठाया कि "संविधान बचाओ" संविधान के प्रति प्रतिबद्धता है या सिर्फ एक राजनीतिक नारा।


