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केटीआर ने तेलंगाना सरकार से उपज की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने कांग्रेस सरकार से 'गहरी नींद' से जागने और तेलंगाना में किसानों की उपज की खरीद सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया

केटीआर ने तेलंगाना सरकार से उपज की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया
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हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने मंगलवार को कांग्रेस सरकार से 'गहरी नींद' से जागने और तेलंगाना में किसानों की उपज की खरीद सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।

केटीआर ने धान, मक्का, मूंगफली और अन्य फसलों की भारी मात्रा में मंडी में पहुंच जाने के बावजूद राज्य सरकार की पूर्ण निष्क्रियता की कड़ी आलोचना की। केटीआर ने मंगलवार को अविभाजित वारंगल जिले के कई खरीद केंद्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।

पार्टी के एक बयान के अनुसार, उन्होंने जंगांव निर्वाचन क्षेत्र के यशवंतपुर, परकला निर्वाचन क्षेत्र के गीसुकोंडा मंडल की उक्कल सोसायटी और नरसामपेट मंडी यार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान केटीआर ने किसानों से बातचीत की और उनकी शिकायतों को विस्तार से सुना।

खरीद में देरी को लेकर किसानों ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग एक महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने कोई स्पष्टता नहीं दी है। 15 दिनों से अधिक समय से खरीद ठप होने के कारण किसानों को भारी नुकसान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि मार्कफेड के अधिकारियों और जिला प्रशासन से बार-बार की गई अपीलों को अनसुना कर दिया गया है।

केटीआर ने मार्कफेड के प्रबंध निदेशक श्रीनिवास रेड्डी से बात की और सरकार के रवैये और एजेंसी की विफलता पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट रूप से बताए कि क्या वह फसलों की खरीद करने का इरादा रखती है या किसानों को उनके हाल पर छोड़ देगी।

केटीआर ने कहा कि सरकार न्यूनतम खरीद स्तर तक भी नहीं पहुंच पाई है। सरकार का दावा है कि उसने 6 लाख मीट्रिक टन मक्का खरीदा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है, किसान अपनी फसल बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

केटीआर ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर खरीद से बच रही है ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,460 रुपए और वादा किया गया बोनस न देना पड़े। सरकार पर मार्कफेड के नाम पर जुटाए गए लगभग 23,000 करोड़ रुपए को अन्य उद्देश्यों में लगाने का भी आरोप लगाया, जिससे एजेंसी आर्थिक रूप से पंगु हो गई है और खरीद कार्य करने में असमर्थ है।

केटीआर ने कहा, "कांग्रेस सरकार किसानों को पूरी तरह से विफल कर चुकी है। अगर उसमें थोड़ी भी जिम्मेदारी की भावना है तो उसे तुरंत रायथु बंधु योजना के तहत धनराशि जारी करनी चाहिए और बिना किसी शर्त के सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए।"

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार किसानों की उपेक्षा करती रही तो बीआरएस अपना आंदोलन तेज करेगी और पूरे राज्य में सरकार का घेराव करेगी।

केटीआर ने यह भी याद दिलाया कि राहुल गांधी ने वारंगल से किसान घोषणापत्र जारी किया था, जिसमें कई वादे किए गए थे, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि बीआरएस उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और तब तक संघर्ष जारी रखेगी जब तक उत्पादित प्रत्येक अनाज की खरीद नहीं हो जाती और किसानों को न्याय नहीं मिल जाता।


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