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महिला आरक्षण बिल की हार पर केटीआर का हमला- ‘जिम्मेदार भाजपा’

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है।

महिला आरक्षण बिल की हार पर केटीआर का हमला- ‘जिम्मेदार भाजपा’
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‘परिसीमन से जोड़कर महिलाओं का हक रोका गया’: बीआरएस नेता का आरोप

  • केटीआर बोले- ‘543 सीटों में तुरंत लागू हो सकता था आरक्षण’
  • ‘दक्षिणी राज्यों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश’: भाजपा पर बीआरएस का निशाना

हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है।

उन्होंने कहा कि यह बिल इसलिए पास नहीं हो पाया, क्योंकि भाजपा ने जान-बूझकर इसे परिसीमन के विवादित मुद्दे से जोड़ दिया, जिससे इसके पास होने की प्रक्रिया पटरी से उतर गई। उन्होंने बताया कि बीआरएस समेत सभी राजनीतिक पार्टियों ने महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन किया था, लेकिन भाजपा के राजनीतिक रवैये की वजह से यह बिल सफल नहीं हो पाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल को बेवजह परिसीमन से जोड़कर भाजपा ने ऐसी मुश्किलें खड़ी कर दीं, जिनसे बचा जा सकता था और इस तरह महिलाओं को उनके हक का प्रतिनिधित्व मिलने से रोक दिया।

केटीआर ने एक बयान में कहा कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही आरक्षण को तुरंत लागू किया जा सकता था, लेकिन भाजपा ने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना चुना।

बीआरएस नेता ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर दक्षिणी राज्यों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है, और कई पार्टियों द्वारा उठाई गई चिंताओं को नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि इस रवैये के कारण महिलाओं के सशक्तिकरण का एक ऐतिहासिक अवसर हाथ से निकल गया।

केटीआर ने कहा कि देश की जनता ने महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा का राजनीतिक ड्रामा देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने इस मुद्दे का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए किया और अब पूरे देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है।

उन्होंने मांग की कि भाजपा तुरंत एक नया महिला आरक्षण बिल लाए, उसे परिसीमन से न जोड़े और अपनी गंभीरता साबित करने के लिए यह सुनिश्चित करे कि आगामी चुनावों से ही इसे लागू किया जाए।

केटीआर ने कहा कि परिसीमन एक जटिल मुद्दा है और चेतावनी दी कि मौजूदा तरीका संसद में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम कर सकता है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि आगे बढ़ने से पहले व्यापक विचार-विमर्श और चर्चा की जाए।

उन्होंने कहा कि संसद में हुए घटनाक्रम से भाजपा को यह सबक मिलना चाहिए कि वह संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों पर एकतरफा फैसले थोपने की कोशिश न करे।

तेलंगाना जागृति के अध्यक्ष के कविता ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने एक बार फिर भारत की महिलाओं के साथ धोखा किया है। उसे यह भली-भांति पता था कि परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने पर विपक्ष इस बिल के खिलाफ वोट करेगा।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह जानते हुए भी कि उनके पास जरूरी संख्या नहीं है, सरकार ने जल्दबाजी में यह बिल पेश किया।

उन्होंने आगे कहा कि इस देश की महिलाओं की भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। मैं सभी महिलाओं से अपील करती हूँ कि वे इस धोखे के जाल को समझें और भाजपा को सबक सिखाएं, इसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल से करें, जहां एक महिला इस लड़ाई की अगुवाई कर रही है। दूसरी बात, अब जब यह बिल पास नहीं हो पाया है, तो उन्हें 2027 की जनगणना का इंतजार करना चाहिए, ताकि ओबीसी के लिए एक उप-कोटा शामिल किया जा सके। जब तक सभी समुदायों का उत्थान नहीं हो जाता, तब तक प्रतिनिधित्व खोखला ही रहता है।


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